रोजगार के दावे के बीच टैक्सी-ऑटो चालकों पर नई आफत
सामना संवाददाता / मुंबई
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से निजी दोपहिया वाहनों को बाइक टैक्सी के रूप में चलाने की अनुमति देने की अपील की है। गडकरी का तर्क है कि बाइक टैक्सी को बढ़ावा देने से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, उनके इस प्रस्ताव ने पहले से ही यात्री परिवहन के क्षेत्र में संघर्ष कर रहे टैक्सी, ऑटो और ऐप आधारित कैब चालकों की चिंता बढ़ा दी है। सवाल यह है कि नए रोजगार पैदा करने की कोशिश में कहीं मौजूदा रोजगार पर ही संकट तो नहीं खड़ा हो जाएगा?
गडकरी ने कहा कि केंद्र ने बाइक टैक्सी को अनुमति देने की नीति स्पष्ट की है, लेकिन कुछ राज्य अभी इसके लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवहन राज्य का विषय है, इसलिए राज्यों को अपने स्तर पर निर्णय लेना होगा। उनका कहना है कि बाइक टैक्सी के विस्तार से ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में लोगों को रोजगार का नया साधन मिल सकता है।
आठ करोड़ रोजगार का दावा
गडकरी के मुताबिक, निजी बाइक टैक्सी और रैपिडो जैसी सेवाओं के जरिए अब तक करोड़ों रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि विभिन्न राज्य सरकारें बाइक टैक्सी को अनुमति देती हैं तो इस क्षेत्र में करीब आठ करोड़ रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। गडकरी ने दोपहिया वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारत में दोपहिया वाहन दुर्घटनाओं में ८१,७८० लोगों की मौत हुई है। ऐसे में निजी दोपहिया वाहनों को बड़े पैमाने पर व्यावसायिक यात्री परिवहन में उतारने से पहले सुरक्षा, चालक प्रशिक्षण, बीमा, परमिट और यातायात नियमों जैसे पहलुओं की पूरी जांच जरूरी होगी।
नए रोजगार के साथ पुराने रोजगार का क्या?
बाइक टैक्सी से रोजगार बढ़ने के दावे के बीच सबसे बड़ा सवाल मौजूदा टैक्सी और ऑटो चालकों के रोजगार को लेकर है। शहरों में टैक्सी और ऑटो चलाकर परिवार पालने वाले लाखों चालक पहले ही ईंधन की बढ़ती कीमत, वाहन की ईएमआई, बीमा, परमिट, रखरखाव और ऐप कंपनियों के कमीशन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
यदि निजी मोटरसाइकिल और स्कूटर चालकों को भी यात्री ढोने की व्यापक अनुमति मिलती है तो मौजूदा टैक्सी और ऑटो चालकों के सामने किराया, सवारी और आमदनी को लेकर प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है। ऐसे में सरकार को बाइक टैक्सी को बढ़ावा देने के साथ-साथ पारंपरिक टैक्सी और ऑटो चालकों के हितों की भी स्पष्ट रूप से रक्षा करनी होगी।
बाइक टैक्सी के साथ सुरक्षा की चुनौती
बाइक टैक्सी के विस्तार से रोजगार का रास्ता खुल सकता है, लेकिन यात्री सुरक्षा भी उतनी ही बड़ी चुनौती है। चालक का सत्यापन, ड्राइविंग रिकॉर्ड, हेलमेट, यात्री बीमा, वाहन फिटनेस और दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी जैसे मुद्दों पर स्पष्ट नियम जरूरी होंगे।
