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मंत्रालय शिफ्ट या मेगा स्कैम?..एअर इंडिया टॉवर डील में घोटाले की बू!.. अपनी ही जमीन १,६०० करोड़ रुपए में खरीद रही सरकार

सुनील ओसवाल / मुंबई

महाराष्ट्र सरकार की बहुचर्चित एअर इंडिया टॉवर डील अब सिर्फ एक सरकारी खरीद नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद बनती जा रही है। सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यकारी अभियंता विद्याधर पाटसकर ने खुद पुष्टि की है कि एअर इंडिया इमारत की खरीद प्रक्रिया पूरी करने के लिए सरकार की ओर से १६०० करोड़ रुपए से अधिक की निधि विभाग को प्राप्त हो चुकी है और कानूनी प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
यहीं से सवालों का तूफान खड़ा हो गया है। क्योंकि जिस २२ मंजिला एअर इंडिया बिल्डिंग को सरकार खरीदने जा रही है, उसी जमीन को लेकर वर्षों से यह चर्चा रही है कि वह मूलत: सरकारी जमीन थी, जिसे समुद्र भराव के बाद एयर इंडिया को लीज पर दिया गया था। हालांकि इस दावे पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि किसी विभाग ने अब तक इसका स्पष्ट खंडन भी नहीं किया। यही वजह है कि मंत्रालय से लेकर राजनीतिक गलियारों तक अब एक ही सवाल गूंज रहा है, क्या सरकार अपनी ही लीज पर दी गई जमीन को अब १६०० करोड़ रुपए देकर वापस खरीद रही है? सार्वजनिक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता विद्याधर पाटसकर ने कहा है कि सरकार से निधि प्राप्त हो चुकी है और करीब एक सप्ताह में एआईएएचएल कंपनी के साथ खरीद प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, लेकिन जैसे-जैसे यह डील आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसकी पारदर्शिता को लेकर संदेह भी बढ़ता जा रहा है। नरीमन पॉइंट के समुद्र किनारे स्थित यह इमारत १९७४ में बनाई गई थी। यानी लगभग ५० साल पुराना निर्माण। ऐसे में विपक्ष और कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इस पुराने ढांचे का मूल्यांकन किस आधार पर किया गया? क्या सरकार जमीन की कीमत चुका रही है, इमारत की या केवल प्रीमियम लोकेशन की?
सी-फेसिंग सत्ता कॉम्प्लेक्स तो नहीं
-सरकार का तर्क है कि मंत्रालय में जगह की भारी कमी है और फोर्ट इलाके में किराए पर चल रहे सरकारी कार्यालयों पर हर साल २०० करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हो रहे हैं।
-एयर इंडिया भवन खरीदकर वहां मंत्रालय और अन्य सरकारी कार्यालय शिफ्ट किए जाएंगे, लेकिन आलोचकों का कहना है कि किराया बचाने के नाम पर सरकार कहीं सी-फेसिंग सत्ता कॉम्प्लेक्स तो नहीं बना रही?
-सूत्रों के मुताबिक, समुद्र किनारे स्थित इस हाई-प्रोफाइल बिल्डिंग में कार्यालय पाने को लेकर कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी खास रुचि दिखा रहे हैं। अब इस पूरी डील पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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