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`परीक्षा पर चर्चा’ करनेवाले मोदी जी सब देख रहे हैं ना… देश के १ लाख स्कूलों में सिर्फ १ शिक्षक!

-शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल

इन दिनों में देश की शिक्षा व्यवस्था की पोल आए दिन खुल रही हैं, जहां एक ओर देश में सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर जो स्कूल बचे भी हैं वहां के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। इस कड़ी में एक और चौंकानेवाली रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट की मानें तो देश में एक लाख से अधिक स्कूल ऐसे हैं, जहां एक ही टीचर हैं। हालांकि, एक बात यह भी है कि हाल के दिनों में इन स्कूलों की संख्‍या घटी है। वैसे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी `परीक्षा पर चर्चा’ तो करते हैं, लेकिन देश के स्कूलों की दयनीय अवस्था पर बात भी नहीं करते।
बता दें कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने हाल ही में इसको लेकर आंकड़े जारी किए हैं। मंंत्रालय के मुताबिक, शैक्षणिक वर्ष २०२४-२५ में देश में १,०४,१२५ एकल-शिक्षक स्कूल हैं, जो पिछले साल २०२३-२४ में १,१०,९७१ से करीब ६ फीसदी कम हो गए। इन स्कूलों में कुल ३३,७६,७६९ स्टूडेंट्स रजिस्‍टर्ड हैं यानी हर स्कूल में औसतन ३४ बच्चे हैं। सबसे अहम बात यह है कि ये स्कूल ग्रामीण इलाकों में ज्यादा हैं, जहां एक टीचर ही सब क्लासेस संभालता है, लेकिन अच्छी बात ये कि सरकारी स्कूलों के मर्जर से इनकी संख्या कम हो रही है। एकल-शिक्षक स्कूल वो हैं, जहां सिर्फ एक टीचर होता है जो कक्षा १ से ८ तक सब पढ़ाता है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम २००९ के मुताबिक प्राइमरी (कक्षा १-५) में छात्र-शिक्षक अनुपात ३०:१ और अपर प्राइमरी (कक्षा ६-८) में ३५:१ होना चाहिए, लेकिन एकल-शिक्षक स्कूलों में ये रेशियो बिगड़ जाता है।
यूपी-एमपी के स्कूलों की हालत गंभीर
२०२४-२५ में भारत में सबसे अधिक एकल-शिक्षक स्कूल आंध्र प्रदेश में १२,९१२ हैं। इसके बाद इस मामले में उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर है, यहां ९,५०८ एकल शिक्षक स्कूल हैं। इसी तरह झारखंड में ९,१७२, महाराष्ट्र में ८,१५२, कर्नाटक में ७,३४९, लक्षद्वीप और मध्य प्रदेश में ७,२१७, पश्चिम बंगाल में ६,४८२, राजस्थान में ६,११७, छत्तीसगढ़ में ५,९७३, तेलंगाना में ५,००१ और दिल्ली में सिर्फ ९ स्कूल हैं जबकि पुडुचेरी, लद्दाख, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, चंडीगढ़ जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में एक भी एकल-शिक्षक स्कूल नहीं है और अंडमान और निकोबार में केवल ४ स्कूल हैं।

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