-देवताओं की संयुक्त शक्ति से प्रकट हुईं आदिशक्ति; महिषासुर का वध कर धर्म और न्याय की रक्षा की
शीतल अवस्थी
मां दुर्गा को शक्ति, साहस और तेज का साकार स्वरूप माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब महिषासुर के अत्याचारों से देवता और मनुष्य त्रस्त हो गए, तब ब्रह्मा, विष्णु, महेश और अन्य देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई। यही शक्ति मां दुर्गा कहलाई।
देवी माहात्म्य के अनुसार महिषासुर ने कठिन तपस्या कर ब्रह्माजी से वरदान प्राप्त किया था कि कोई देवता या पुरुष उसका वध न कर सके। वरदान के अहंकार में उसने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। सभी देवता सहायता के लिए भगवान विष्णु और शिव के पास पहुंचे।
महिषासुर के अत्याचारों का वर्णन सुनकर देवताओं के मुख से प्रचंड तेज निकला। सभी तेज मिलकर एक दिव्य नारी के रूप में परिवर्तित हो गए। भगवान शिव के तेज से देवी का मुख, विष्णु के तेज से भुजाएं, ब्रह्मा के तेज से चरण और अन्य देवताओं की शक्तियों से उनके शरीर के विभिन्न अंग प्रकट हुए।
देवताओं ने दिए अस्त्र-शस्त्र
भगवान शिव ने देवी को त्रिशूल, विष्णु ने चक्र, वरुण ने शंख, अग्निदेव ने शक्ति, वायुदेव ने धनुष-बाण और इंद्र ने वज्र प्रदान किया। हिमालय ने सिंह वाहन और समुद्र ने आभूषण भेंट किए। इस प्रकार समस्त देवशक्तियों से संपन्न देवी युद्ध के लिए तैयार हुईं।
मां दुर्गा के सिंहनाद से तीनों लोक कांप उठे। देवी और महिषासुर की सेना के बीच भीषण युद्ध हुआ। महिषासुर कभी भैंसा, कभी सिंह, कभी हाथी और कभी मनुष्य का रूप धारण करके युद्ध करता रहा। अंततः देवी ने त्रिशूल और अन्य अस्त्रों से उसका वध कर देवताओं को भयमुक्त किया।
तेज का आध्यात्मिक अर्थ
मां दुर्गा का तेज केवल बाहरी युद्ध की शक्ति नहीं है। वह मनुष्य के भीतर मौजूद आत्मविश्वास, विवेक और अन्याय का सामना करने के साहस का प्रतीक है। महिषासुर को अहंकार, क्रोध, अज्ञान और अनियंत्रित इच्छाओं का प्रतीक माना जाता है। देवी की विजय इन नकारात्मक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण की प्रेरणा देती है।
देवी की स्तुति में कहा गया है—
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
देवी आराधना का संदेश
नवरात्रि में उपवास, मंत्र-जप और पूजा के साथ आत्मचिंतन का भी महत्व है। यदि मनुष्य अन्याय का विरोध करे, निर्बल की रक्षा करे, महिलाओं का सम्मान करे और अपने भीतर के अहंकार पर विजय पाए, तो यही मां दुर्गा की वास्तविक आराधना है।
मां दुर्गा का तेज बताता है कि जब सकारात्मक शक्तियां एकजुट होती हैं, तब कितना भी शक्तिशाली अन्याय क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है।
