जेदवी
बारिश ने छीना हजारों यात्रियों का सुकून
मुंबई-गुजरात रेल मार्ग पर हालात इतने बिगड़ गए कि पश्चिम रेलवे को ६१ ट्रेनों को पूरी तरह रद्द करना पड़ा। दर्जनों ट्रेनें बीच रास्ते में रोकनी पड़ीं, जबकि कई का मार्ग बदलना पड़ा।
दक्षिण गुजरात और पालघर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने सिर्फ रेल पटरियों को ही नहीं, बल्कि हजारों यात्रियों की उम्मीदों को भी थाम दिया है। किसी की मंजिल अधूरी रह गई, तो किसी का अपने परिजनों तक पहुंचने का सपना बीच रास्ते में अटक गया। सबसे बड़ी कीमत उन यात्रियों को चुकानी पड़ रही है, जिनका कसूर सिर्फ इतना है कि उन्होंने अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए ट्रेन का टिकट लिया था।
मुंबई सेंट्रल, बांद्रा टर्मिनस, सूरत, वडोदरा, भरूच, विरार और वसई जैसे स्टेशनों पर हजारों लोग घंटों से अपनों तक पहुंचने की आस लगाए बैठे हैं। किसी की गोद में भूखा मासूम बिलख रहा है, तो कहीं बुजुर्ग दवा और पानी के इंतजार में निढाल बैठे हैं। कई परिवारों के पास खाने-पीने का सामान खत्म हो चुका है। आठ से पंद्रह घंटे तक ट्रेन के डिब्बों में फंसे यात्रियों के चेहरों पर थकान, बेचैनी और बेबसी साफ झलक रही है।
सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि अनेक यात्रियों को समय रहते ट्रेन रद्द होने या मार्ग बदलने की सूचना तक नहीं मिली। अचानक यात्रा ठप हो जाने से कई स्टेशन अफरा-तफरी का केंद्र बन गए। मध्य प्रदेश के बामनिया और थांदला रोड स्टेशन पर गुस्साए यात्रियों का पटरियों पर उतरना और इंजन पर चढ़कर विरोध करना उनकी मजबूरी, टूटते धैर्य और बढ़ती निराशा की तस्वीर बन गया।
रेलवे पुलों पर पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है और कई स्थानों पर पटरियों के नीचे की मिट्टी बह जाने से रेल यातायात लगभग ठहर गया है। राहत की बात यह है कि कई स्टेशनों पर प्रशासन, सामाजिक संस्थाएं और स्वयंसेवक भोजन, पानी, चाय और दवाइयां उपलब्ध कराने में जुटे हैं, लेकिन बढ़ती भीड़ के सामने ये प्रयास भी अपर्याप्त साबित हो रहे हैं।
बारिश का यह कहर कब थमेगा, इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। हजारों यात्रियों की निगाहें अब सिर्फ पटरियों पर नहीं बल्कि उस एक घोषणा पर टिकी हैं, जो उन्हें यह भरोसा दे सके कि उनका सफर फिर से शुरू होगा और वे सुरक्षित अपने अपनों तक पहुंच पाएंगे। यात्रियों की यही बेबसी आज इस आपदा की सबसे दर्दनाक तस्वीर बन गई है।
भूख-प्यास से फंसे यात्री
मूसलाधार बारिश ने पश्चिम रेलवे की रफ्तार रोक दी। ६१ ट्रेनें रद्द होने से हजारों यात्री स्टेशनों और ट्रेनों में फंस गए। भूख, प्यास और अनिश्चितता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है, आपदा में यात्रियों को समय पर सूचना और पर्याप्त राहत आखिर कब मिलेगी?
