मुख्यपृष्ठनए समाचारमुंबई मसाला : विरार-चर्चगेट लोकल बनी जीत के जश्न की गवाह!

मुंबई मसाला : विरार-चर्चगेट लोकल बनी जीत के जश्न की गवाह!

-तिरंगा रैली में शामिल होने उमड़ा जनसैलाब

-हर डिब्बे में गूंजे ‘भारत माता की जय’ और ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ के नारे

जेदवी

रविवार की सुबह मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली वेस्टर्न रेलवे की विरार-चर्चगेट लोकल केवल यात्रियों को मंजिल तक पहुंचाने का साधन नहीं रही, बल्कि छात्रों के संघर्ष, उत्साह और जीत की भावनाओं को अपने साथ लेकर दौड़ती एक चलती-फिरती जनसभा बन गई। दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुए लंबे छात्र आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर ने देशभर के छात्रों में नई ऊर्जा भर दी। इसी जीत का उत्सव मनाने के लिए दादर के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में आयोजित तिरंगा रैली में शामिल होने हजारों छात्र और समर्थक पश्चिमी उपनगरों से लोकल ट्रेनों के जरिए मुंबई पहुंचे।
सुबह से ही विरार, वसई, नालासोपारा, भायंदर और मीरा रोड स्टेशनों पर अलग ही नजारा देखने को मिला। हाथों में तिरंगा, कंधों पर बैग और चेहरों पर जीत की मुस्कान लिए छात्र समूहों में प्लेटफॉर्म पर पहुंच रहे थे। जैसे ही लोकल ट्रेन प्लेटफॉर्म पर लगी, पूरा डिब्बा जोश और उत्साह से भर गया। किसी ने तिरंगा लहराया तो किसी ने साथियों के कंधे पर हाथ रखकर जीत के गीत गुनगुनाए। कुछ ही देर में पूरे डिब्बे में एक साथ आवाज गूंजी ‘भारत माता की जय’ ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ ‘वंदे मातरम्’ और फिर तालियों की गड़गड़ाहट ने माहौल को और भी जोशीला बना दिया।
ट्रेन के हर स्टेशन पर नए-नए छात्र इस कारवां में जुड़ते गए और नारों की गूंज और बुलंद होती गई। रोजमर्रा की भागदौड़ में सफर करने वाली लोकल के डिब्बे उस दिन संघर्ष से मिली जीत की कहानी कहते नजर आए। कई यात्रियों ने मुस्कुराकर उनका हौसला बढ़ाया तो किसी ने मोबाइल वैâमरे में इस यादगार पल को वैâद कर लिया। कुछ बुजुर्ग यात्रियों ने युवाओं के जोश को देखकर कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने का यही जज्बा देश की सबसे बड़ी ताकत है।
जीत का जोश, बारिश भी बेअसर
भारी बारिश, भीड़ और लंबा सफर भी छात्रों के उत्साह को नहीं रोक सका। दादर के शिवाजी पार्क पहुंचते ही हजारों युवाओं ने तिरंगा लहराकर जीत का जश्न मनाया। मुंबई की लाइफलाइन उस दिन सिर्फ ट्रेन नहीं, बल्कि उम्मीद, एकता और लोकतांत्रिक संघर्ष की सबसे बड़ी गवाह बन गई।

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