-बेस्ट कर्मियों की हड़ताल से
-१९ जून से अनिश्चितकालीन आंदोलन
जेदवी / मुंबई
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़ी है। इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (बेस्ट) कर्मचारियों की संयुक्त यूनियनों ने १९ जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का एलान किया है। यदि यह हड़ताल शुरू होती है तो लाखों मुंबईकरों की दूसरी जीवनरेखा मानी जाने वाली ‘बेस्ट’ बस सेवा बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। सवाल यह है कि आखिर कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ा?
यूनियनों ने लगाए अनदेखी के आरोप
यूनियनों का आरोप है कि कर्मचारियों की वर्षों पुरानी मांगों को लेकर प्रशासन और सरकार दोनों उदासीन बने हुए हैं। कई दौर की बैठकों और चर्चाओं के बावजूद कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसके कारण अब हड़ताल ही अंतिम विकल्प बचा है।
बता दें कि इस हड़ताल में बस चालक, कंडक्टर, परिवहन और बिजली विभाग के कर्मचारी शामिल होंगे। ऐसे में केवल बस सेवाएं ही नहीं, बल्कि बेस्ट से जुड़ी अन्य सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है। इसका सीधा खामियाजा नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को भुगतना पड़ सकता है।
कर्मचारियों की यह हैं प्रमुख मांग
यूनियनों ने वेतन वृद्धि, ठेका कर्मचारियों को स्थायी करने, बेस्ट के बजट को बीएमसी के बजट में शामिल करने जैसी मांगों को लेकर आंदोलन का एलान किया है। इसके अलावा बेस्ट के बेड़े में ५,००० स्वामित्व वाली बसें शामिल करने तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया भुगतान को जल्द पूरा करने की भी मांग की गई है। यूनियन नेताओं का कहना है कि बार-बार ध्यान दिलाने के बावजूद प्रशासन की ओर से केवल आश्वासनों का दौर चलता रहा, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कर्मचारियों में इसी बात को लेकर भारी नाराजगी है।
सरकार की चुप्पी से बढ़ी चिंता
हड़ताल की घोषणा के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है। हालांकि, बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन समय तेजी से निकलता जा रहा है। यदि जल्द कोई रास्ता नहीं निकला तो मुंबई की परिवहन व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में अब सबकी नजर प्रशासन और यूनियनों के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी है। सवाल यह है कि क्या सरकार समय रहते संकट टाल पाएगी या फिर मुंबईकरों को एक और अव्यवस्था का सामना करना पड़ेगा?
