सूफी खान
अमेरिका ईरान पर ताबड़तोड़ बम बरसा रहा है। जवाब में ईरान खाड़ी के अमेरिकी ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोन से दहला रहा है। लेकिन इसी जंग के बीच अब मैदान में कूद पड़ी है एक और महाशक्ति। खबर है कि रूस ने अपना सबसे गोपनीय डूम्स डे प्लेन ईरान भेज दिया है। ये अमेरिका को खुली चुनौती भी है। क्या रूस अब खुलकर ईरान की ढाल बन गया है, इस पर भी चर्चा शुरु हो गई है। ये जंग अब सिर्फ ईरान वर्सेस अमेरिका नहीं रही।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव मॉस्को में प्रेस के सामने आए और सीधे अमेरिका पर हमला बोल दिया। उन्होंने कहा – ‘वॉशिंगटन ने खुद के किए हुए एमओयू की धज्जियां उड़ा दी हैं। अमेरिका की ये सैन्य कार्रवाई मिडिल-ईस्ट को तबाही की तरफ धकेल रही है।’ लावरोव का आरोप है कि अमेरिकी बम सिर्फ ईरान पर नहीं गिर रहे। पर्शियन गल्फ के नागरिक ठिकानों, ट्रांसपोर्ट सिस्टम और शिप्स को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
रूस का साफ कहना है कि मिसाइलों से मसले हल नहीं होते, अगर यही चला तो पूरा खाड़ी क्षेत्र एक नए सैन्य संकट में फंस जाएगा। रूस ने अमेरिका के साथ होने वाले किसी भी नए समझौते की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़ा कर दिया। उधर ईरान ने भी यूएन चार्टर का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका ने आम नागरिकों और मालवाहक जहाजों को निशाना बनाया है। इस बीच सबसे बड़ा फ्लैशपॉइंट बना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, ईरान ने सिक्योरिटी का हवाला देकर इस रास्ते को अस्थायी तौर पर बंद कर दिया। वहीं दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि ‘होर्मुज पर अमेरिका का कंट्रोल है, इसे खोल दिया गया है।’ कमाल की बात तो ये है कि एक कह रहा बंद है, दूसरा कह रहा खुला है।
लेकिन सबसे चौंकाने वाली खबर ये है कि इसी तनाव के बीच रूस का डुम्स डे प्लेन ईरान पहुंचा। ये वही विमान है जिसे परमाणु जंग की स्थिति में इस्तेमाल किया जाता है। आधिकारिक तौर पर रूस ने मकसद नहीं बताया। लेकिन दुनिया समझ गई कि मॉस्को का सिग्नल साफ है। रूस ने बता दिया है कि तेहरान अकेला नहीं है। अब सोशल मीडिया पर चर्चा शुरु हो गई है कि क्या रूस सिर्फ कूटनीतिक बयानबाजी तक रुकेगा या फिर इस जंग में हथियार, खुफिया मदद और सीधी ढाल बनकर उतरेगा। फिलहाल एक बात तय है कि मिडिल-ईस्ट की ये लड़ाई अब मिसाइलों की नहीं रही। ये दुनिया की सबसे बड़ी ताकतों के बीच सीधे टकराव की कहानी बन चुकी है।
