सूफी खान
इजरायल के साथ पिछले कुछ सालों से अच्छे रिश्तों की ओर बढ़ रहे संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई ने भी अब नेतन्याहू सरकार को आंखें दिखाई हैं। अक्टूबर २०२३ के बाद से गाजा में जारी जंग को लेकर अब यूएई शांत ही रहा था। वो इजरायल के साथ अब्राहम समझौते से भी बंधा हुआ है। लेकिन अब उसने इजरायल को चेतावनी दी है कि यदि वेस्ट बैंक की ओर उसने नजर उठाई तो फिर सीमा पार हो जाएगी। ऐसा पहली बार है, जब यूएई ने इस तरह इजरायल के खिलाफ सख्त स्टैंड लिया है। दरअसल, कई यूरोपीय मुल्कों के साथ ऑस्ट्रेलिया एवं कनाडा ने एलान किया है कि वे फिलिस्तीन को मान्यता देंगे। इसके जवाब में नेतन्याहू सरकार प्लान बना रही है कि वेस्ट बैंक का विलय कर लिया जाए।
वेस्ट बैंक के विलय वाले प्लान पर ही यूएई से सख्त चेतावनी आई है। यूएई का कहना है कि ऐसा कदम इजरायल और फिलिस्तीन विवाद में नई आग लगाएगा। इसके अलावा टू-स्टेट सॉल्यूशन वाला फॉर्मूला तो फिर खत्म ही हो जाएगा।
यूएई के इस बयान पर फिलिस्तीन अथॉरिटी के विदेश मंत्रालय ने तुरंत जवाब दिया और कहा कि हम स्वागत करते हैं। इजरायल की सरकार की ओर से यूएई के बयान पर फिलहाल कोई जवाब नहीं आया है। इससे पहले इजरायल के वित्त मंत्री बेजालेल स्माट्रेक ने एक ऐसा प्रस्ताव रखा था, जिसमें कहा गया कि इजरायल की ओर से ८० फीसदी वेस्ट बैंक का विलय किया जा सकता है।
इजरायल ने १९६७ की जंग के दौरान वेस्ट बैंक का एक हिस्सा कब्जा कर लिया था, जिसमें ७ लाख यहूदी बसते हैं। इसके अलावा पूर्वी येरूशलम का एक हिस्सा भी इजरायल के नियंत्रण में ही है। इस जगह को फिलिस्तीनी वापस चाहते हैं, ताकि फिलिस्तीन मुल्क बना सकें। एक अनुमान के अनुसार वेस्ट बैंक में करीब ३३ लाख फिलिस्तीनी रहते हैं। अब इसके बड़े हिस्से पर इजरायली कब्जे के प्लान ने यूएई तक को उकसा दिया है। साल २०२० में अमेरिकी मध्यस्थता में अब्राहम अकॉर्ड या इब्राहिम समझौता हुआ था। इसमें इजरायल के साथ राजनयिक रिश्ते स्थापित करने पर यूएई, बहरीन और मोरक्को ने सहमति जताई थी। इस समझौते की बड़ी चर्चा हुई थी। यहूदी, इस्लाम और ईसाई मजहबों में हजरत इब्राहिम एक ऐसी शख्सियत हैं, जो अलग-अलग नामों से तीनों में महत्व रखते हैं।
ऐसे में उन्हें आधार बनाते हुए ही इसका नाम अब्राहम अकॉर्ड रखा गया। तब से अब तक इजरायल के साथ इन देशों ने रिश्ते बहाल रखे हैं और गाजा पर हमलों के दौरान भी कुछ नहीं कहा। लेकिन अब रिएक्शन आया है तो इसके गहरे अर्थ हैं। दरअसल, नेतन्याहू सरकार के कई दक्षिणपंथी मंत्री चाहते हैं कि वेस्ट बैंक को पूरा ही या उसके बड़े हिस्से का विलय कर लिया जाए।
