सूफी खान
पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ ‘एक पर हमला, दूसरे पर भी माना जाएगा’ वाला डिफेंस पैक्ट तो कर डाला, लेकिन पाकिस्तानी नेतृत्व और फौज ने इसके खतरों का कितना भी आकलन किया हो, उन्हें सिर मुंडाते ही ओले पड़ गए। ये किसी ने नहीं सोचा था कि पाकिस्तान को इतनी जल्दी अपने सैनिकों को मोर्चे पर उतारने की जरूरत पड़ सकती है।
पाकिस्तान की सेना और सरकार अपने वादे के मुताबिक, सऊदी अरब की यमन के अंसारुल्लाह के खिलाफ मदद करने तो जा रही है, लेकिन वहां के मीडिया में ये भी चर्चा और फिक्र शुरू हो गई है कि कहीं पाकिस्तान मिडिल ईस्ट में जारी अंतहीन या कभी खत्म न होने वाली जंग में न घसीट लिया जाए। एक्सपर्ट कहते हैं कि पाकिस्तान की इकोनॉमी पहले ही बुरी तरह कमजोर है। वो अफगानिस्तान में तालिबान के साथ जंग जैसे हालात में है और उसे अपने सरहदी इलाकों में भड़के विद्रोह से भी दो-चार होना पड़ रहा है। इसमें बलूचिस्तान सबसे आगे है। ऐसे में किसी और के मामले में टांग घुसाना पाकिस्तान के लिए बहुत फायदे का सौदा नहीं लगता। जबकि सऊदी अरब के पास लड़ाकू जेट और हथियारों का जखीरा है, जिसकी कीमत कई अरब डॉलर है, लेकिन उसके पास हूतियों से लड़ने का युद्ध अनुभव नहीं है। देखा गया है कि अंसारुल्लाह के लड़ाके मुश्किल से मुश्किल हालात में लड़ने का माद्दा रखते हैं। ये मौजूदा जंग से साबित हो चुका है। ऐसे में जब सऊदी हिमायती फौजें एडवांस हथियार लगाकर भी यमन में उनका कुछ नहीं बिगाड़ पा रही हैं, तो पाकिस्तान क्या ही कर लेगा, ये बड़ा सवाल है।
इतना ही नहीं, पाकिस्तान को इस पैâसले के बाद घरेलू स्तर पर अवामी गुस्से से भी दो-चार होना पड़ेगा। ईरान के बाद पाकिस्तान में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी शिया मुस्लिम आबादी है। ऐसे में ईरान हिमायती अंसारुल्लाह के खिलाफ यमन हमलों में पाकिस्तान की भागीदारी के विरोध में वहां प्रदर्शन होने की आशंका है। हालांकि, पाकिस्तान ने २५ हजार अतिरिक्त सैनिक सऊदी अरब भेजने का पैâसला तो कर लिया है, लेकिन अब तक उसका और तुर्की का स्टैंड ये है कि उनके सैनिक यमन में लड़ने नहीं जाएंगे, बल्कि सऊदी में ही होने वाले हूतियों के हमलों से निपटेंगे।
सऊदी अरब में इस तैनाती में पाकिस्तानी सेना, वायु सेना और नौसेना सहित सेना के सभी बलों के साथ-साथ मिसाइल और रॉकेट फोर्स को भी तैनात किया जाएगा। ऐसा कहा जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना सऊदी अरब की राजधानी रियाद और धार्मिक शहर मक्का और मदीना की रक्षा के लिए खास तौर पर तैनात की जाएगी।
सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैनिक पहले से ही तैनात हैं। पाकिस्तान के हजारों सैनिक और सैन्य सलाहकार सऊदी अरब की सुरक्षा और खुफिया सहायता की भूमिका में सहयोग कर रहे हैं। वहीं अंसारुल्लाह के लड़ाकों ने भी दो-टूक कहा है कि अगर पाकिस्तान या तुर्की की सेनाएं सऊदी अरब के साथ मिलकर उनके खिलाफ आक्रामक कार्रवाई में शामिल हुर्इं, तो वे इसका कड़ा जवाब देंगे। हूतियों ने यह भी धमकी दी है कि दखलंदाजी की स्थिति में पाकिस्तानी कमर्शियल जहाजों और व्यापारिक मार्गों को लाल सागर व बाब-अल-मंदब के पास निशाना बनाया जा सकता है।
