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मुस्लिम वर्ल्ड : सीजफायर के पीछे बड़ा खेल, ईरान चुपचाप अमेरिका को कर रहा ‘आइसोलेट’!

सूफी खान

अमेरिका के जरिए घोषित किए गए एकतरफा सीजफायर के बीच ईरान ने पोस्ट वॉर डिप्लोमेसी बहुत तेजी से शुरु कर दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने २४ घंटे में तीन देशों का दौरा किया। ईरानी विदेश मंत्री रविवार को पाकिस्तान पहुंचे, वो तीन दिन में दूसरी बार इस्लामाबाद गए और वहां पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की। इससे पहले उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और अन्य बड़े अधिकारियों से भी बात की थी।
मीडिया रिपोर्ट बता रही हैं कि अब्बास अराघची ने पाकिस्तान में एक रेड लाइन दस्तावेज सौंपा, जिसमें ईरान की साफ शर्तें बताई गईं। कहा जा रहा है कि आगे भी ईरान पाकिस्तान में अमेरिका से अपनी तय शर्तों पर ही बात करेगा। इतना ही नहीं ईरान के विदेश मंत्री अराघची ओमान गए। वहां उन्होंने सुलतान हैथम बिन तारिक से मुलाकात की। एक्सपर्ट कहते हैं कि ईरान जंग के बाद से इस जुगाड़ में लग गया है कि अगर रिजनल सिक्योरिटी बरकरार रखनी है तो अमेरिका को बाहर करना होगा। दरअसल, ईरान अपने दोस्त अरब मुल्कों को ये समझाने की कोशिश कर रहा है कि हमारी लड़ाईयां अपनी जगह हैं लेकिन अमेरिका वहां रहेगा तो आप नुकसान में रहेंगे। ओमान में तो ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज से जुड़े देशों को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह रास्ता सुरक्षित रहे, क्योंकि इससे पूरी दुनिया को फायदा होता है। कुछ मीडिया रिपोर्ट दावा करती हैं कि ईरान-ओमान के साथ मिलकर होर्मुज में एक टोल बूथ बनाने वाला है। होर्मुज का एक छोर ओमान में है।
ईरानी फॉरेन मिनिस्टर पहुंचे रूस
इसके बाद सोमवार को ईरान के फॉरेन मिनिस्टर रूस पहुंच गए, दरअसल, रूस मिडिल ईस्ट में एक बड़ा खिलाड़ी है और चीन के साथ मिलकर ईरान का साथ भी दे रहा है। कहा जाता है कि सीरिया में पूर्व राष्ट्रपति बशर अल असद के तख्तापलट की कवायद चल रही थी तब रूस ही उन्हें सुरक्षित बचाकर ले गया था। जानकार बताते हैं कि उस वक्त ये डील हुई थी कि तुर्की सीरिया में टेकओवर करेगा और वहां मौजूद असद और ईरान समर्थकों को एचटीएस के लड़ाके हाथ नहीं लगाएंगे। लेकिन खबर है कि ऐसा नहीं हो रहा है तुर्की ने सीरिया में अपना दखल कम किया है और ईरान समर्थकों पर हमले बढ़े हैं।
आईआरजीसी यानी पासदाराने इंकलाब ने साफ कहा है कि इस पर नियंत्रण रखना उनकी रणनीति का हिस्सा है। सीजफायर के बीच तो ईरान का कंट्रोल होर्मुज पर मजबूत हुआ है। दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर नाकाबंदी कर रखी है। एक्सपर्ट कहते हैं कि अब्बास अरागची के लगातार दौरे बता रहे हैं कि ईरान डिप्लोमेसी के मोर्चे पर भी अमेरिका की नकेल कसने की कोई कसर बाकी नहीं रख रहा है।

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