मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड : क्या ईरान में चली जाएगी खामेनेई की सत्ता?

मुस्लिम वर्ल्ड : क्या ईरान में चली जाएगी खामेनेई की सत्ता?

सूफी खान

ईरान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। वहां एक अमेरिकी डॉलर १.४२ मिलियन ईरानी रियाल के बराबर हो गया है, जिसके चलते वहां जबरदस्त महंगाई बढ़ गई है। ईरानी रियाल का डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड स्तर पर गिरना वहां असंतोष की वजह बन रहा है। करीब एक सप्ताह से ईरान एक गंभीर आर्थिक और राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। हालांकि, अभी ये स्पष्ट नहीं है कि ये प्रदर्शन किस स्तर तक जाएंगे। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या ये ईरान में सत्ता के खिलाफ या फिर शासन परिवर्तन के लिए हो रहे प्रदर्शन हैं। नेपाल और बांग्लादेश में हुए मुजाहिरों से लोग इन्हें जोड़कर देख रहे हैं।
कहा जा रहा है कि इन प्रदर्शनों के दौरान सुप्रीम लीडर खामेनेई के खिलाफ नारे लगे। एक्सपर्ट कहते हैं कि ईरान में साल २००९ और २०२२ में अलग-अलग कारणों से ऐसे प्रदर्शन हो चुके हैं, लेकिन वहां इन पर काबू पा लिया गया था। चूंकि ईरान एक लोकतांत्रिक देश है, ऐसे में वहां प्रदर्शन करने की इजाजत है और सरकारें इन प्रदर्शनों को सुनती हैं और समस्याओं का हल भी निकालती हैं।
खबर है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियान ने रिजर्व बैंक के गवर्नर को बर्खास्त कर दिया है और प्रदर्शनकारियों से कहा है कि वो उनसे हर स्तर पर बात करने के लिए तैयार हैं।
प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक तंगी से आगे बढ़कर राजनीतिक नारे लगाए हैं। ईरान के फार्स प्रांत की राजधानी शिराज में सरकारी भवन पर हमला और पुलिस द्वारा आंसू गैस का इस्तेमाल करना हालात को और ज्यादा कशीदा या तनावपूर्ण बना रहा है। साल २०२२ में भी ईरान में हिजाब विरोधी प्रदर्शन हुए थे और ईरान ने इस तरह के प्रदर्शनों के पीछे होने का आरोप पश्चिमी ताकतों पर लगाया था।
ईरान में जिस तरह का तंत्र है और जिस तरह से सरकार चलती है, उससे फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि खामेनेई की सत्ता का तख्तापलट तुरंत होनेवाला है। ईरान में सत्ता सिर्फ सरकार के हाथ में नहीं, बल्कि रिवोल्यूशनरी गार्ड आईआरजीसी, सुरक्षा एजेंसियों और धार्मिक तंत्र के मजबूत नियंत्रण में है। ईरान का इतिहास बताता है कि ईरानी शासन ने पहले भी बड़े विरोध प्रदर्शनों को सख्ती से दबाया है।
सरकार की रणनीति फिलहाल संयमित दिख रही है। सब्सिडी या कर राहत जैसे छोटे उपाय घोषित होते हैं, तो प्रदर्शन कुछ हफ्तों में कम हो सकते हैं। ईरान का इतिहास दिखाता है कि आर्थिक प्रदर्शन अक्सर दबाव में दब जाते हैं। लेकिन जनता में सरकार पर भरोसे की कमी इसे अस्थायी समाधान बना सकती है। हालांकि, साल २०२५ में १२ दिनों की जंग के दौरान दुनिया ने देखा था कि किस तरह ईरान की अवाम ने सारे मतभेद भुलाकर वहां की सरकार का साथ दिया था।

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