मनमोहन सिंह
स्वच्छता और सुशासन के नाम पर देश भर में पुरस्कार बटोरने वाली नई मुंबई महानगरपालिका का एक ऐसा सच सामने आया है, जो बेहद खौफनाक है। कागजों और विज्ञापनों में ‘ग्लोबल’ दिखने वाली इस महानगरपालिका के पास वाशी में ३०० बिस्तरों का मुख्य अस्पताल और ऐरोली, नेरुल, बेलापुर में १००-१०० बिस्तरों के भव्य अस्पताल हैं। लेकिन जमीनी हकीकत में यह आलीशान ढांचा सिर्फ एक ‘शो-पीस’ साबित हो रहा है। हाल ही में एक गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे की दर्दनाक मौत ने इस चमचमाती प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
करोड़ों का खर्च, फिर भी ‘रेफरल’ का जानलेवा खेल
लगभग ५० करोड़ रुपये पंâूककर विभिन्न अस्पतालों में अत्याधुनिक आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर बनाए गए, नेताओं ने फीते भी काटे। लेकिन सवाल यह है कि जब ऐरोली, नेरुल और बेलापुर के अस्पतालों में कागजों पर आईसीयू और मेडिसिन विभाग मौजूद हैं, तो गंभीर स्थिति में मरीजों को दूसरे अस्पतालों में क्यों रेफर किया जाता है।
