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महाराष्ट्र में भी लगने लगे ‘नो पेट्रोल-डीजल’ के बोर्ड!

-तेल के लिए मची मारामारी; परभणी, बुलढाणा, वाशिम के बाद पालघर-कोकण भी चपेट में

सुनील ओसवाल / मुंबई

महाराष्ट्र में पेट्रोल और डीजल का संकट अब धीरे-धीरे भयावह रूप लेता जा रहा है। राज्य के कई जिलों में पेट्रोल पंप सूख चुके हैं, जबकि जहां र्इंधन उपलब्ध है, वहां भारी भीड़, अफरातफरी और झगड़े की घटनाएं सामने आ रही हैं। परभणी, बुलढाणा और वाशिम के बाद अब पालघर जिले तथा कोकण के ग्रामीण इलाकों में भी र्इंधन संकट गहराने लगा है। कई पेट्रोल पंपों पर ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड लगाए गए हैं।
खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़े असर के कारण देशभर में र्इंधन आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। महाराष्ट्र में इसका असर सबसे पहले ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में दिखाई दे रहा है।
बुलढाणा में हालात सबसे गंभीर
बुलढाणा जिले में हालात सबसे ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं। जिले के १६५ पेट्रोल पंपों में से आधे से अधिक पंप पिछले तीन दिनों से बंद पड़े हैं। लोगों को कई किलोमीटर दूर जाकर पेट्रोल-डीजल भरवाना पड़ रहा है।
पेट्रोल पंप पर हो रही है मारपीट!
राज्य में पेट्रोल-डीजल का संकट गंभीर होता जा रहा है। बुलढाणा जिले के सिंदखेड राजा तालुका के मलकापुर पांगरा स्थित पेट्रोल पंप पर पेट्रोल भरवाने को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि कुछ लोगों ने एक युवक की बेरहमी से पिटाई कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मौके पर पुलिस मौजूद थी, लेकिन समय पर हस्तक्षेप नहीं किया गया। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया।
वाशिम जिले में भी डीजल की भारी किल्लत देखी जा रही है। शहर के छाबड़ा पेट्रोल पंप पर डीजल टैंकर पहुंचते ही वाहनों की लंबी लाइन लग गई। लाइन में आगे निकलने को लेकर शुरू हुआ विवाद हाथापाई तक पहुंच गया। कुछ देर के लिए पंप परिसर रणक्षेत्र में बदल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले तीन दिनों से डीजल की सप्लाई बेहद कम हो गई है। परभणी जिले में भी स्थिति लगातार बिगड़ रही है। मुख्य डिपो से समय पर आपूर्ति नहीं होने के कारण कई पंप पूरी तरह खाली हो चुके हैं। जिन पंपों पर थोड़ा बहुत स्टॉक बचा है वहां सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। लोगों में यह डर बढ़ता जा रहा है कि आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं। इधर, पालघर जिले और कोकण के ग्रामीण भागों में भी पेट्रोल-डीजल की कमी का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन, खेती और मछली व्यवसाय प्रभावित होने लगा है।
परिवहन व्यवस्था हो सकती है ठप
कई गांवों में लोग डिब्बों और वैâनों में र्इंधन जमा करते दिखाई दे रहे हैं। कुछ इलाकों में निजी वाहनों की आवाजाही भी कम होने लगी है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने आपूर्ति सामान्य करने के प्रयास तेज करने का दावा किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। यदि जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो राज्य के कई हिस्सों में परिवहन व्यवस्था और आवश्यक सेवाएं प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

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