हिमांशु राज़
उज्जैन के पावन महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में भस्म आरती की सुगंध अभी भी हवा में लहरा रही थी कि बॉलीवुड अभिनेत्री नुसरत भरूचा के दर्शन को लेकर धार्मिक तूफान खड़ा हो गया। 30 दिसंबर की सुबह मंदिर पहुंचीं नुसरत ने विधि-विधान से जलाभिषेक किया, तिलक लगाया और महाकाल बाबा के चरणों में सिर झुकाया। यह उनका तीसरा दौरा था, लेकिन इस बार सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने आग लगा दी। बरेलवी समुदाय के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रज़वी ने इसे शरीयत के खिलाफ गुनाह-ए-अज़ीम करार देते हुए फतवा जारी कर दिया। मौलाना ने साफ कहा कि इस्लाम मंदिर में पूजा-पाठ, जल चढ़ाने या तिलक लगाने की इजाजत नहीं देता। नुसरत को अल्लाह से माफी मांगनी चाहिए, तौबा करनी चाहिए और कलमा पढ़कर पाप धोना चाहिए। “अल्लाह से माफी मांगे नुसरत…” वाली यह लाइन मीडिया हेडलाइंस बन गई, जिसने पूरे बॉलीवुड को हिला दिया। नुसरत की फिल्में जैसे ‘चंदु चैंपियन’ और ‘अकीरा’ से मिली पहचान अब धार्मिक बहस के केंद्र में है। क्या मुस्लिम एक्ट्रेस का हिंदू मंदिर दर्शन व्यक्तिगत आस्था है या सामाजिक उन्माद? सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई। एक तरफ नुसरत के समर्थक धार्मिक स्वतंत्रता की दुहाई दे रहे हैं, कहते हैं कि भारत की विविधता में सबका अपना विश्वास है। दूसरी ओर सख्तपंथी फतवे का साथ दे रहे हैं, इसे इस्लामी गरिमा का सवाल बता रहे हैं। उज्जैन प्रशासन ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन मंदिर ट्रस्ट ने दर्शन को सामान्य बताया। नुसरत की चुप्पी ने विवाद को और हवा दी। क्या वे जवाब देंगी या चुप रहकर तूफान को शांत होने देंगी? यह घटना बॉलीवुड और धर्म के जटिल रिश्ते को उजागर करती है। सनी लियोन मथुरा विवाद के बाद नुसरत का महाकाल दौरा साबित करता है कि सेलिब्रिटीज़ की धार्मिक यात्राएं अब सिर्फ भक्ति नहीं, राजनीतिक बवाल बन रही हैं। महाकाल बाबा की कृपा सब पर बनी रहे, लेकिन फतवे की आग कब बुझेगी?
