पत्रकार बिरादरी के लिए आखिरकार एक अच्छी खबर आई है। युगांडा ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन में पत्रकार और संपादक रहे एडवर्ड रुकीडी किजानंगोमा अब टोरो साम्राज्य के राजा एडवर्ड रुकीडी न्याबोंगो प्रथम बन गए हैं। हालांकि, यह राजपद सांस्कृतिक है, राजनीतिक सत्ता वाला नहीं।
मतलब वर्षों तक दूसरों के बयान काटते-काटते आदमी सीधे राजतिलक तक पहुंच गया। भारतीय पत्रकारों में उम्मीद की लहर है। उन्हें पहली बार लगा है कि संपादक बनने के बाद भी करियर में कुछ बचा रह सकता है।
यहां पत्रकार की अधिकतम तरक्की क्या होती है?
रिपोर्टर से सीनियर रिपोर्टर, फिर विशेष संवाददाता और अंत में व्हॉट्सऐप ग्रुप का एडमिन। उधर न्याबोंगो साहब न्यूज एंकर की कुर्सी से उठे और सीधे सिंहासन पर बैठ गए।
पहले वह पूछते होंगे, ‘महाराज, जनता को क्या संदेश देंगे?’ अब कोई उनसे पूछेगा, ‘महाराज, जनता को क्या संदेश देंगे?’ बस माइक की दिशा बदल गई। हालांकि, भारतीय पत्रकार ज्यादा उत्साहित न हों। यहां राजाओं की कमी नहीं है, हर पार्टी में एक, हर जिले में चार और हर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कम से कम सात मिल जाएंगे।
संकट केवल इतना है कि उनके दरबार में पत्रकार को सिंहासन नहीं मिलता, सिर्फ प्रेस रिलीज मिलती है। फिर भी न्याबोंगो की कहानी प्रेरणादायक है। कलम चलाते रहिए, क्या पता किसी दिन संपादक वेतन न बढ़ाए। लेकिन जनता मुकुट पहना दे। पत्रकार पहली बार खबर लिखते-लिखते खुद शाही खबर बन गया।
