मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में एफआईआर दर्ज होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर चढ़ावा कब से उड़ाया जा रहा था। पुलिस जांच फिलहाल इसका सटीक जवाब देने की स्थिति में नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि मंदिर परिसर की केवल 45 दिन की ही सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध हो सकी है। कोई इसे प्राण प्रतिष्ठा के समय से जोड़ रहा है तो कोई मंदिर निर्माण के दौरान से ही अनियमितताओं की आशंका जता रहा है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि अभी तक किसी जांच एजेंसी ने नहीं की है। ऐसे में अब पूरी जांच उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे बढ़ रही है।
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, उपलब्ध फुटेज के आधार पर ही घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। इससे पहले की रिकॉर्डिंग उपलब्ध न होने के कारण जांच अब दस्तावेजों, कर्मचारियों के बयानों, लेखा-जोखा और अन्य साक्ष्यों पर केंद्रित है। यदि पुराने वित्तीय रिकॉर्ड, दान रजिस्टर या अन्य ठोस साक्ष्य मिलते हैं तो जांच का दायरा बढ़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, चढ़ावा चोरी के मामले में अनुकल्प मिश्रा और टिन्नू को ही मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। यह दावा किया जा रहा है कि चोरी की स्क्रिप्ट इन्होंने लिखी। दोनों ही चंपत राय के करीबियों में गिने जाते थे। इनमें टिन्नू के पास दान पेटिकाओं की चाबी रहती थी।
हाल ही में उसने अपने भतीजे मनीष को भी भर्ती करवाया था, जिसके माध्यम से भी उसके हिस्से की धनराशि उस तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा अन्य सभी आरोपी मौका मिलने पर हाथ साफ कर देते थे। जो जिस अवधि से भी गणना कार्य में शामिल हुआ, थोड़े समय में ही चोरी के लिए ट्रेंड हो गया। लोग लंबे समय से चोरी की आशंका जता रहे हैं और बड़ी मात्रा में धनराशि चोरी होने का दावा कर रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर केवल साक्ष्यों के आधार पर ही पहुंचा जाएगा। इसलिए 45 दिन से पहले की अवधि को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक दावा नहीं किया जा सकता।
