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दूसरे दिन भी भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूटा …मंत्री का घेराव, गाड़ी पर पोती कालिख और उग्र प्रदर्शन!

टिकट बंटवारे में पक्षपात को लेकर थम नहीं रही नाराजगी
सुनील ओसवाल / मुंबई
बुधवार को छत्रपति संभाजीनगर में भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी लड़ाई सड़कों पर खुलकर दिखाई दी। महानगरपालिका चुनाव के नामांकन के अंतिम दिन टिकट बंटवारे को लेकर भड़के कार्यकर्ताओं ने भाजपा नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लगातार दूसरे दिन हुए इस हंगामे ने पार्टी की संगठनात्मक एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छत्रपति संभाजीनगर के केंद्रीय प्रचार कार्यालय के बाहर सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता जमा हुए। विरोध प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय मंत्री भागवत कराड का घेराव किया गया, जबकि महाराष्ट्र सरकार के वैâबिनेट मंत्री अतुल सावे की गाड़ी पर कार्यकर्ताओं ने कालिख पोतकर नाराजगी जताई।

संतप्त कार्यकर्ता ने आत्मदाह का किया प्रयास!
-हालात बिगड़ते देख पुलिस को करना पड़ा हस्तक्षेप

हालात बिगड़ते देख पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और दोनों नेताओं को सुरक्षा घेरे में वहां से हटाया गया। प्रदर्शन के दौरान एक संतप्त कार्यकर्ता ने आत्मदाह का प्रयास किया। उसने अपने ऊपर केरोसिन डालते हुए आरोप लगाया कि वर्षों तक पार्टी के लिए काम करने वाले निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर नए चेहरों, निजी सहायकों और नजदीकी लोगों को टिकट दिए गए हैं। पुलिस की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस घटना ने असंतोष की गहराई को उजागर कर दिया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि टिकट वितरण में किए गए सर्वेक्षणों को सार्वजनिक नहीं किया गया और चुनिंदा लोगों को प्राथमिकता दी गई। कुछ कार्यकर्ताओं ने सामाजिक संतुलन के नाम पर पक्षपात का आरोप भी लगाया।
महिला कार्यकर्ताओं का आमरण अनशन
– अगर सर्वेक्षण हमारे खिलाफ है तो उसे सामने लाया जाए, ऐसी मांग प्रदर्शन के दौरान खुलकर रखी गई। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने नेताओं के पोस्टर फाड़े, नारेबाजी की और पार्टी नेतृत्व पर विश्वासघात का आरोप लगाया।
-इसी बीच टिकट न मिलने से आहत एक महिला कार्यकर्ताओं ने प्रचार कार्यालय के बाहर आमरण अनशन शुरू कर दिया है। लगातार दूसरे दिन सड़कों पर उतरा यह असंतोष भाजपा के लिए चुनावी मौके पर बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है।
-संगठन के भीतर उभरी दरारें अब सार्वजनिक हो चुकी हैं और इसका असर निकाय चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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