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सीयूएसबी के कंप्यूटर विज्ञान विभाग द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

अनिल मिश्र / पटना

बिहार प्रदेश के ऐतिहासिक नगरी गयाजी के पंचानपुर में स्थित दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के कंप्यूटर विज्ञान विभाग द्वारा कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के मार्गदर्शन में ‘प्रोजेक्ट एआई सक्षम भारत – एआई उपयोगकर्ताओं से एआई निर्माताओं तक’ पहल के अंतर्गत एक दिवसीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला एनएसआईसी तकनीकी सेवा केंद्र, बोधगया तथा ऐक्सपर्ट्स इनोवेशन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से आयोजित की गई। कार्यशाला में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जनरेटिव एआई, उभरती प्रौद्योगिकियों, उद्योग जगत की आवश्यकताओं तथा भविष्य में उपलब्ध करियर के अवसरों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। कार्यशाला में विभाग के प्राध्यापकों प्रो. प्रभात रंजन, डॉ. नेमी चंद्र राठौर, डॉ. कुरुबा चंद्रकला, डॉ. पीयूष कुमार सिंह, डॉ. मृत्युंजय सिंह एवं डॉ. प्रकाश कुमार के साथ विभाग के शोधार्थी तथा एमएससी (कंप्यूटर विज्ञान एवं एआई) के विद्यार्थियों ने सहभागिता की। इस संबंध में दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के जन संपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यशाला का उद्घाटन प्रो. जयनाथ यादव, विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर विज्ञान विभाग ने किया तथा प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए शिक्षा, अनुसंधान एवं व्यावसायिक विकास में उभरती प्रौद्योगिकियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के महत्व पर प्रकाश डाला। मनोज कुमार, केंद्र प्रमुख, एनएसआईसी; कमल नयन, सदस्य, एनएसआईसी; तथा प्रदीप कुमार, संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एक्सपर्ट्स इनोवेशन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड ने संसाधन व्यक्तियों के रूप में अपनी भूमिका निभाई। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जनरेटिव एआई, उभरती प्रौद्योगिकियों, व्यावहारिक अनुप्रयोगों, उद्योग-केंद्रित कौशल तथा भविष्य के करियर अवसरों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। वक्ताओं ने शैक्षणिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक एवं उद्योग-केंद्रित कौशल विकसित करने के महत्व पर भी विशेष जोर दिया। प्रतिभागियों को एआई उपकरणों एवं प्रौद्योगिकियों का उपयोग केवल अंतिम उपयोगकर्ता के रूप में करने के बजाय संभावित निर्माता, नवप्रवर्तक एवं समस्या-समाधानकर्ता के रूप में उन्हें समझने और विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को तकनीकी एवं व्यावसायिक क्षेत्र में तेजी से बदलते परिवेश के अनुरूप आवश्यक कौशल विकसित करने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका को समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम ने उद्योग एवं शिक्षा जगत के बीच संवाद और सहभागिता को भी सुदृढ़ किया तथा प्रतिभागियों को एआई उपयोगकर्ताओं से एआई निर्माताओं एवं नवप्रवर्तकों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। तकनीकी सत्र के पश्चात डॉ. पीयूष कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यशाला को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकगण, संसाधन व्यक्तियों, सहयोगी संस्थानों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

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