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विदेशी फंडिंग भरोसे लोगों का ‘स्वास्थ्य’! …१४,६३५ करोड़ की परियोजना में ८० % होगी विदेशी निधि

-अपग्रेड और अस्पतालों के नाम पर कर्ज का बढ़ रहा दबाव
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
विदेशी कर्ज के सहारे ‘हेल्थ मॉडल’ खड़ा करने की तैयारी के बीच महायुति सरकार ने ३,७०८ करोड़ रुपए के कर्ज को मंजूरी देकर एक बड़ा और विवादास्पद दांव खेला है। जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी के सहयोग से प्रस्तावित १४,६३५ करोड़ रुपए की इस विशाल परियोजना में ८० फीसदी विदेशी फंडिंग की जाएगी। इसे लेकर नर्सिंग अपग्रेड, मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों के विस्तार के नाम पर बढ़ते कर्ज के दबाव को लेकर विपक्ष और विशेषज्ञों ने सरकार की मंशा और दीर्घकालिक प्रभावों पर तीखा हमला बोला है।
महाराष्ट्र में तृतीय स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और नर्सिंग प्रणाली को मजबूत करने के नाम पर महायुति सरकार ने बड़ा वित्तीय पैâसला लेते हुए विदेशी कर्ज का रास्ता अपनाया है। सोमवार को जारी जीआर के मुताबिक, जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी से ३,७०८ करोड़ रुपए का कर्ज लेने की मंजूरी दी गई है, जबकि कुल परियोजना लागत १४,६३५ करोड़ रुपए तय की गई है। इसमें ८० प्रतिशत यानी १३,७०८ करोड़ रुपए विदेशी फंडिंग होगी, जबकि राज्य सरकार को २० प्रतिशत यानी १,९२७ करोड़ रुपए वहन करना होगा।
खुलेंगे नए मेडिकल कॉलेज
परियोजना के तहत वर्धा, पालघर, रत्नागिरी और अहिल्यानगर में नए सरकारी मेडिकल कॉलेज शुरू किए जाएंगे। मुंबई के जीटी और सेंट जॉर्ज सहित धुले, सोलापुर, अंबेजोगाई, अकोला, नागपुर, रत्नागिरी, पालघर और धाराशिव में नर्सिंग कॉलेजों का उन्नयन किया जाएगा और नए बीएससी नर्सिंग कॉलेज बनाए जाएंगे। इसी के साथ ही बारामती, सांगली (मिरज), कोल्हापुर, भंडारा, गडचिरोली, हिंगोली, जालना, मुंबई, नासिक, परभणी, सातारा, पालघर, रत्नागिरी और वर्धा में नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की भी योजना है।

०.८० फीसदी देना होगा ब्याज
इसके साथ ही भारत-जापान शैक्षणिक आदान-प्रदान, अस्पताल प्रबंधन और मानव संसाधन विकास जैसे क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी शामिल हैं। कर्ज की शर्तों के अनुसार, परियोजना पर २.७० प्रतिशत और परामर्श सेवाओं पर ०.८० प्रतिशत ब्याज देना होगा, जबकि ०.२ प्रतिशत प्रâंट-एंड शुल्क भी लगेगा। समय पर परियोजना पूरी होने पर ०.१ प्रतिशत शुल्क वापस किया जाएगा।

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