मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ
उत्तर प्रदेश भाजपा में गोरखपुर के क्षत्रपों की लड़ाई शांत होने का नाम ही नहीं ले रही है। एक मामले का पटाक्षेप होता है तब तक दूसरा सामने आ जाता है। ताजा मामला भाजपा विधानमंडल दल के कक्ष में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के चित्र को आज तक स्थान नहीं मिलने का है। विदित है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा विधानमंडल दल के नेता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। दोनों ही पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से आते हैं। आश्चर्य तो यह है कि प्रदेश अध्यक्ष के चित्र वाले स्थान पर आज भी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री बन चुके चौधरी भूपेंद्र सिंह का चित्र लगा है। चित्र के लगने न लगने का भले यहाँ कोई महत्व न हो पर गोरखपुर में यह योगी विरोधी खेमे के लिये एक सबक बनेगा। पिछले महीने गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कर कमलों से होने वाले देवरिया फ्लाईओवर के उद्घाटन में राज्यसभा सांसद डॉ राधा मोहन दास अग्रवाल को अधिकारियों द्वारा न बुलाने से जोड़ कर देखा जा रहा है। इससे भी पूर्व पंकज चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष होने से पहले केंद्रीय राज्यमंत्री कमलेश पासवान के स्टेडियम का उद्घाटन था। जिसमें तत्कालीन वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी मुख्य अतिथि और डॉ राधा मोहन दास अग्रवाल विशिष्ट अतिथि थे। उस उद्घाटन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को नहीं बुलाया गया था, जबकि उस दिन योगी जी गोरखपुर में ही थे। कमेटी बनने के बाद बहुत बड़ी संख्या में पद पाने में असफल हुये नेताओं ने अध्यक्ष जी के घर का गूगल मैप मिटा दिया है। बताते हैं कि गुरुजी की भी दुकान ठंढी पड़ गयी है। लेकिन वह बिजनेश परमोटर लगा के सफल अभ्यर्थियों पर जबरदस्ती आशीर्वाद देने का दबाव बना रहे हैं।बनने वाले ऐसे अभ्यर्थी जो बनने से पहले उनसे भी आशीर्वाद मांगने गये थे अब वह वह उनको अपने आशीर्वाद के फलीभूत होने की महिमा बता कर चिरंजीवी करने की कृतज्ञता व्यक्त करने की जबर्दस्ती कर रहे हैं, लेकिन शिष्य भी गजबै हाईटेक हो गये, जब व्याख्यान का डोज बदहजमी तक पहुंच जाता है तब भाई साहब के नाम की दुहाई देकर भाग पाते हैं। गुरुजी हाथ से तोते उड़ने की मनोदशा में पहुँच कर मौन हो जाते हैं।
