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पटना में पीके का बड़ा ऐलान , बायोडाटा दफ्तर में जमा किजीए,दस हजार बेरोजगार युवाओं को तुरंत दिलाएंगे नौकरी

अनिल मिश्र / पटना

बिहार प्रदेश के राजधानी पटना स्थित और देश के सबसे चर्चित विधानसभा में शुमार बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा को हरा कर विधायक बने प्रशांत किशोर आज फिर से सुर्खियों में आ गए हैं। इस बार उन्होंने नौकरी देने का ऐलान किया है। यह भी कहा कि अब बिहार के लोगों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा। पीके का यह बयान आज राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।आज मंगलवार को पटना के बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर किसी का बच्चा पढ़ा-लिखा है और नौकरी की तलाश कर रहा है तो उसका सीवी और बायोडाटा उनके ऑफिस में जमा करें।इस बीच उन्होंने कहा कि कम से कम दस हजार बच्चों को नौकरी दिलाने की व्यवस्था करने की कोशिश की जाएगी।इस संबंध में उन्होंने साफ कहा कि अभी सरकारी नौकरी का वादा नहीं किया जा रहा है। उनकी कोशिश बड़े निजी कंपनियों और अपने संपर्क में मौजूद लोगों के जरिए युवाओं को प्राइवेट नौकरी दिलाने की होगी।इस बीच प्रशांत किशोर ने उन लोगों को भी जवाब दिया, जो उनकी जीत के बाद उनके इलाके में नहीं दिखने को लेकर सवाल उठा रहे थे।उन्होंने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि जीत के पांच से सात दिन बाद से वह कहां घूम रहे हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि वह कहीं घूम नहीं रहे हैं, बल्कि लोगों का ही काम कर रहे हैं और इसी काम की घोषणा करने के लिए यहां आए हैं।इस बीच प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर से पढ़े-लिखे जो बच्चे नौकरी की तलाश में हैं, उन्हें बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाने की कोशिश की जाएगी।इस बीच उन्होंने कहा कि बिहार के किसी भी विधानसभा क्षेत्र की तुलना में अगर सबसे ज्यादा बच्चों को नौकरी मिलेगी तो वह बांकीपुर से मिलेगी।इसके लिए उनकी टीम और उनके संपर्क में रहने वाले बड़े लोगों की मदद ली जाएगी।प्रशांत किशोर ने युवाओं को लेकर अपनी योजना के बारे में साफ किया कि वह सरकारी नौकरी देने का वादा नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी दिलाना उनके हाथ में नहीं है. उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रहेगी कि बेरोजगार बच्चों को ऐसी प्राइवेट नौकरी मिले, जिससे वे अपने जीवन का खर्च चला सकें और सम्मान के साथ कमाई कर सकें।इस खबर की सूचना मिलते ही बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में पीके के सरकारी और प्राइवेट नौकरी के मुद्दे इन पार्टियों के लिए खतरे की घंटी न बन जाये जो अभी तक बिहार की राजनीति में जात- पात और धर्म एवं परिवार के नाम पर राजनीति करते हैं और सता का मलाई भी वर्षों से खाते आ रहे हैं।

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