मुख्यपृष्ठस्तंभजिन्होंने छात्रों की बात नहीं सुनी उन्हीं से डिग्री क्यों?

जिन्होंने छात्रों की बात नहीं सुनी उन्हीं से डिग्री क्यों?

-सीजेआई सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाने पर नालसर विश्वविद्यालय में बवाल

-छात्रों का कहना है कि एक लॉ यूनिवर्सिटी के तौर पर नालसर उन्हें संवैधानिक अधिकारों, न्याय और संस्थानों की जवाबदेही जैसे मूल्यों की समझ देता है। इसलिए उन्हें लगता है कि दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि का चयन भी इन्हीं सिद्धांतों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

उमन गुप्ता
हैदराबाद की नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (नालसर) में आगामी दीक्षांत समारोह को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रेजुएट होनेवाले छात्रों के एक समूह ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से मांग की है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत को समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाने के कथित प्रस्ताव पर दोबारा विचार किया जाए।
छात्रों ने वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और प्रोफेसरों को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री बांटने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह यूनिवर्सिटी के मूल्यों और सोच को भी दिखाता है। ऐसे में मुख्य अतिथि का चयन भी संवैधानिक अधिकारों, न्याय तक पहुंच और लोगों की शिकायतों पर गंभीरता से विचार करने जैसी नालसर की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप होना चाहिए।
छात्रों की नाराजगी की मुख्य वजह
छात्रों की नाराजगी की मुख्य वजह २० जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए ‘चलो संसद’ प्रदर्शन से जुड़ा मामला है। यह प्रदर्शन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की ओर से आयोजित किया गया था। प्रदर्शन में नीट परीक्षा के संचालन और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की कार्यप्रणाली समेत कई मुद्दे उठाए गए थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसी मामले में प्रदर्शनकारियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया था। छात्रों का कहना है कि पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए लिस्ट किए जाने से इनकार किए जाने को लेकर वे चिंतित हैं।
सीजेआई की कथित टिप्पणी पर भी सवाल
छात्रों ने अपने पत्र में २२ जुलाई की सुनवाई से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का हवाला दिया है। उनका दावा है कि जब वकील ने प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती के वीडियो सबूत दिखाने की पेशकश की तो सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है।’ छात्रों के मुताबिक, वकील जब प्रदर्शन के पीछे उठाए जा रहे मुद्दों के बारे में अपनी बात रख रहे थे, तब उन्हें बीच में रोकते हुए ‘बहुत-बहुत धन्यवाद’ कहा गया। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि सुनवाई के दौरान युवाओं को लेकर की गई कथित टिप्पणी से छात्र आहत हैं।
१७० से ज्यादा प्रदर्शनकारियों के घायल होने का दावा
छात्रों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक अलग पत्र के जरिए इस मामले में स्वत: संज्ञान लेने की मांग भी की गई है। इस याचिका में महिलाओं और बच्चों समेत १७० से ज्यादा प्रदर्शनकारियों के घायल होने का दावा किया गया है। छात्रों ने अपने पत्र में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित ‘डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य’ फैसले का भी जिक्र किया है। उनका कहना है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान नागरिकों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े तय मानकों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
‘नालसर के मूल्यों से मेल नहीं खाता’
ग्रेजुएट होनेवाले छात्रों का कहना है कि वे ऐसे व्यक्ति से डिग्री लेने को लेकर असहज हैं, जिनके हालिया सार्वजनिक व्यवहार को लेकर उनके मुताबिक प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के गंभीर आरोपों को नजरअंदाज किए जाने की धारणा बनी है।

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