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‘डिंक कपल’ ट्रेंड से गर्भ पर संकट …करियर के फेर में मातृत्व कुर्बान!

‘नो किड्स’ सोच से घट रही प्रजनन क्षमता
सर्वे में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
सामना संवाददाता / मुंबई
करियर और आधुनिक लाइफस्टाइल की अंधी दौड़ ने नई पीढ़ी की मातृत्व सोच को झकझोर कर रख दिया है। देशभर में हुए सर्वे से चौंकाने वाला सच सामने आया है, जिसमें १८ फीसदी जेन-जी महिलाएं अब संतान पैदा ही नहीं करना चाहती हैं। बढ़ते `डिंक कपल’ ट्रेंड यानी ड्यूल इनकम, नो किड्स ने प्रजनन क्षमता पर गहरा संकट खड़ा कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि ४१ फीसदी महिलाएं प्रजनन संबंधी जानकारी के लिए सोशल मीडिया पर आंख मूंदकर भरोसा कर रही हैं। इतना ही नहीं ६५ फीसदी महिलाओं को प्रजनन जांच और ५६ फीसदी को एग-फ्रीजिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की कोई जानकारी ही नहीं है।
मदरहुड अस्पताल और नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी ने देश के विभिन्न शहरों में जाकर जेन-जी पीढ़ी के प्रजनन स्वास्थ्य पर हाल ही में एक सर्वेक्षण किया। सर्वे में सामने आया कि डिंक कपल के ट्रेंड से प्रजनन क्षमता पर प्रतिकूल असर हो रहा है व १८ प्रतिशत जेन-जी महिलाएं संतान पैदा करना नहीं चाहतीं, साथ ही ३५ वर्ष की उम्र के बाद प्रजनन क्षमता में उल्लेखनीय गिरावट आ रही है। विभिन्न पेशेवर पृष्ठभूमि की २३ से ३० वर्ष आयु वर्ग की २०० से अधिक जेन-जी महिलाएं इस सर्वेक्षण में शामिल हुईं। इनमें से आधे से अधिक को लगता है कि ३५ वर्ष के बाद प्रजनन क्षमता काफी हद तक कम हो जाती है। आंकड़े बताते हैं कि ४१ प्रतिशत महिलाएं प्रजनन क्षमता की प्राथमिक जानकारी सोशल मीडिया से लेती हैं। गर्भधारण के उचित समय के बारे में पूछे जाने पर २५ प्रतिशत महिलाओं ने माना कि २५ के आसपास गर्भधारण करना जरूरी है। हालांकि, ६५ प्रतिशत महिलाओं को एएमएच टेस्ट की जानकारी नहीं है और ५६ प्रतिशत को एग- फ्रीजिंग के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है।

जीवनशैली की महत्वपूर्ण भूमिका
बेंगलुरु की फर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. शरवरी मुंढे बताती हैं कि सर्वे में यह भी सामने आया कि २० प्रतिशत महिलाओं में थायराइड, एंडोमेट्रियोसिस और पीसीओएस जैसी बीमारियों का पता चला है। लेकिन इसके बावजूद वे चिकित्सकीय मदद लेने में हिचकिचाती हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह हृदय स्वास्थ्य के लिए जीवनशैली महत्वपूर्ण है, उसी तरह प्रजनन स्वास्थ्य पर भी उसका गहरा असर होता है। शराब और धूम्रपान से दूर रहना, केवल पका हुआ भोजन लेना, जंक फूड से बचना, नियमित व्यायाम करना और पौष्टिक आहार लेना बेहद आवश्यक है।

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