-मोदी ने किया संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर कुठाराघात!
-पब्लिक ने मोदी और संस्थाओं से ज्यादा भरोसा किया एक अकेले राहुल पर!
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
देश में नेता विपक्ष राहुल गांधी के प्रति लोगों के भरोसे का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। इन दिनों लोगों में राहुल की विश्वसनीयता चरम पर पहुंच चुकी है। यही वजह है कि वोट चोरी पर उनके द्वारा किए जा रहे खुलासों पर पूरा देश आंख बंद करके भरोसा कर रहा है। यहां तक कि इस मुद्दे ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को भी अभूतपूर्व रूप से कटघरे में खड़ा कर दिया है, लेकिन राहुल की एक-एक बात पर नेटीजंस, युवा, स्टूडेंट, जेन-जी, बच्चे-बूढ़े सभी आंख बंद करके भरोसा कर रहे हैं। यह सचमुच हैरान करने वाला है। ११ साल से लगातार सत्ता में बने मोदी व भाजपाइयों पर देश के लोगों का भरोसा जहां टूटता ही चला गया, वहीं लोगों को यह यकीन हो गया है कि राहुल गांधी कभी झूठ नहीं बोलते। कहा जा सकता है कि जिन्हें कभी पप्पू कहकर मजाक का विषय बनाने की कोशिश की गई, उन्हीं राहुल ने अपनी सादगी और सच्चाई से पूरे ‘इंडिया’ का दिल जीत लिया। दूसरी ओर, पीएम नरेंद्र मोदी पर देश की संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर कुठाराघात करने और इन संस्थाओं पर लोगों का भरोसा खत्म करने के आरोप लगते आए हैं। सोशल मीडिया पर उनके लिए ‘जुमलेबाज’ का उपयोग धड़ल्ले से करते नेटीजंस को देखा जा सकता है। संवैधानिक संस्थाओं पर मोदी के कब्जे की बातें भी आम हैं। इसके बावजूद इंडिया की पब्लिक ने इन सभी के बजाए एक अकेले राहुल पर कहीं ज्यादा भरोसा करना गवारा किया। यह सचमुच हैरानी की बात लगती है। सबसे ज्यादा तो चुनाव आयोग की किरकिरी हुई है। आजादी के बाद से कभी चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हुए उसे इस कदर कटघरे में खड़ा किसी ने नहीं किया था। यहां तक कि टीएन शेषण को कई चुनावी सुधारों के लिए देश ने काफी सम्मान भी दिया। लेकिन ज्ञानेश कुमार गुप्ता ने इन सब की लुटिया डुबो दी। वोटचोरी पर राहुल गांधी के सनसनीखेज खुलासों के बाद ज्ञानेश कुमार की भाजपाई भाषा वाले कथित पे्रस कॉन्प्रâेंस के बाद तो लोगों ने चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त पर भरोसा करना ही बंद कर दिया है।
गोदी मीडिया से उठा भरोसा
कभी लोकतंत्र का चौथा खंभा कही जाने वाली मुख्यधारा की मीडिया के गोदी मीडिया में तब्दील हो जाने के बाद भी लोग समझ नहीं पा रहे थे कि २०१४ से आखिर मीडिया को हो क्या गया है! तभी राहुल गांधी ने गोदी मीडिया को टारगेट करना शुरू किया और पूरे देश ने गोदी मीडिया का भरोसा करना बंद कर दिया।
