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रौबीलो राजस्थान : भलो मिनख

बुलाकी शर्मा
राजस्थान
गाय माफक सीधो-सुधो दीखणियो जीव भलो मिनख मानीजै अर म्हैं दूजां साम्हीं भलो मिनख दीखण सारू आ इमेज जोध-जवान बण्यो जणै सूं बणा राखी है।
भायलां रै सौभाग अर म्हारै दुरभाग सूं कॉलेज में कॉ-अ‍ेज्युकेशन हो अर पैलपोत भर-जवान छोरियां साथै क्लास में पढ़ण अर साथै बैठण रो जोग बण्यो। म्हारा भायला खुल’र बात्यां करता, कॉपी-किताबां-नोट्स रै लैण-दैण रै ओळावै प्रेम-पत्रां अर प्रेम रै लैण-दैण रो कारोबार करता पण म्हारै तो छोरियां साम्हीं ताका-झांकी करण री सोचतां पसैवो छूटण लागतो।
सीधे-सादै री इमेज बां साम्हीं झांकण नै रोकती पण अ‍ेकलो हुवतो जणै मनोमन फिल्मी हीरो उनमान बां साथै डांस करतो, गाणा गावतो, भायलां नै विलैन मान’र बां री कुटाई करतो, हीरोइन साम्हीं म्हैं ही-मैन अर बा म्हारी दीवानी।
जवानी गई, अधेड़ हुयग्यो पण सीधो-सादै री इमेज कायम राखण री मूरखता सूं मुगत नीं हुयो। आ इमेज म्हनैं बंदी बणाय राख्यो है। किणी मनमोवणी सूरत नै चोर निजरां सूं डरपीज्योड़ो निरखूं जणै हिवड़ै में कंपकंपी छूटण लागै कै जे उण मोवणी सूरत नै ठाह लागग्यो तो म्हारी भलै मिनख री इमेज धूड़िया हुय जासी।
अधेड़ावस्था में ई मन उमर रै बंधन सूं मुगत‌ रैवै। मन में सोवणी छवियां बिराज्योड़ी रैवै। जूना साहित्यकार ई इण साच नै स्वीकारियो। प्रेमी-प्रेमिकावां रै मिळण रा गुर बताया। खड़ी बोली री पैली पोथी ‘चंदायन’ रा सिरजक दाऊद प्रियतम अर प्रियतमा रै मिलण री भरोसेमंद अर नचींती ठौड़ बताई मिंदर। ‘चंदायन’ री नायिका चंदा आपरै प्रियतम नै मिलण सारू मिंदर बुलावै। महाकवि पृथ्वीराज राठौड़ ई मन रा पक्का पारखी हा। ‘वेलि क्रिसन रुकमणि री’ में वां क्रिसन कन्हाई नै मिंदर पूगण री सैन करतां रुकमणी नै दरसाई है।
अबै तो प्रेम रै पंख लागग्या है अर ऑपनली ‘लव लव लव हो गया’, ‘इश्क इश्क इश्क इणमें‌ कांयरी रिस्क’ खुल’र कैवण लागग्या है। पैला इश्क करण में नीं, ओपन करण में रिस्क हो जणै मंदिर जावण रै मिस मिलण री स्थितियां घड़ीजती। फिल्मी गीत रा अ‍े बोल अधेड़ तन में बैठ्यै म्हारै जवान मन में ओजूं गूंजै – मैं तुमसे मिलने आई मंदिर जाने के बहाने।
अधेड़ावस्था में मिंदर-देवरा जायां भलै मिनख री इमेज पुख्ता हुवै। म्हारै मन-मिंदर में अणगिणत मन-मोवणी मूरतियां बसियोड़ी है अर अबै ई नूंवी-नूंवी मूरतियां आयनै बिराजती रैई है। मन-मिंदर में बसियोड़ी मन-मोवनी मूरतियां साथै रास खैलण रो मन करै पण आ भलै मिनख री ओढ्योड़ी इमेज युवावस्था नै खराब करी, अबै इण अधेड़ावस्था नै बिरथा बणाय रैई है।

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