मुख्यपृष्ठस्तंभनाश्ता याद रहा, बच्चा छूट गया: तीर्थयात्रा में ‘हेड-काउंट’ गायब!

नाश्ता याद रहा, बच्चा छूट गया: तीर्थयात्रा में ‘हेड-काउंट’ गायब!

हिमाचल प्रदेश, ऊना के अंब में छह अक्टूबर को लखनऊ के तीर्थयात्रियों का टेम्पो ट्रैवलर चाय-नाश्ते के बाद आगे निकल गया; आठ साल का बच्चा ढाबे पर ही रह गया। करीब ८० किलोमीटर बाद परिवार को भूल का पता चला। ढाबे के लोगों ने पुलिस को खबर दी; सीसीटीवी से वाहन ट्रेस हुआ और पुलिस ने बच्चे को परिजनों से मिलाया। बच्चा सुरक्षित रहा; यह राहत ढाबे के कर्मचारियों और पुलिस की तत्परता से मिली। ओए होए, यात्रा में दर्शन-स्थल, नाश्ते का पड़ाव और वाहन की सीटें सब गिन ली गईं; बस एक जरूरी यात्री की गिनती छूट गई! परिवार ८० किलोमीटर आगे पहुंचा, तब याद आया कि जत्थे का सबसे छोटा सदस्य साथ नहीं है। मजाक अपनी जगह; आठ साल के बच्चे का अकेले छूट जाना गंभीर चूक है। ढाबे के कर्मचारियों ने उसे संभाला और पुलिस ने वैâमरों की मदद से वाहन खोजा। सीसीटीवी ने रास्ता दिखाया; पर बच्चों की गिनती परिवार की जिम्मेदारी है। अगली तीर्थयात्रा में प्रसाद, पानी और टिकट के साथ बच्चों की गिनती भी रखिए; भगवान के दर्शन बाद में, पहले सब यात्री गाड़ी में पूरे हों।
फोटो हटाने पर थप्पड़बाजी
फरीदाबाद में मुद्दा पीछे, फ्रेम आगे!
फरीदाबाद में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शन में नारे वोट और लोकतंत्र के थे; लेकिन चर्चा फोटो और हाथापाई की होने लगी। पुलिस के मुताबिक, फोटो हटाने को लेकर दो महिला नेत्रियों में विवाद हुआ। दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दी है; पुलिस जांच कर रही है और अभी मामला दर्ज नहीं हुआ है। भाई, प्रदर्शन का मकसद बड़ा था; पर तस्वीर में कौन आगे और किसकी फोटो रहे, इस सवाल ने पूरा फ्रेम ही बदल दिया। जनता वोट की बात सुनने आई थी, उसे पार्टी के भीतर जगह और छवि की खींचतान का लाइव प्रसारण मिल गया। कैमरा भी सोचता होगा; किसे रिकॉर्ड करूं, मुद्दे को या मंच पर चल रही आपसी पटकथा को? फरीदाबाद की इस घटना में दोनों पक्षों की शिकायतें हैं; इसलिए फैसला पुलिस जां+च पर छोड़ना ठीक होगा। मगर राजनीतिक दलों के लिए दृश्य में एक छोटा-सा सबक जरूर है; जब प्रदर्शन का संदेश फोटो से बड़ा न रह पाए, तो खबर में नारा नहीं, थप्पड़ सुर्खी बन जाता है। घणी अजब बात है; लोकतंत्र की तस्वीर बचाने निकले थे, और तस्वीर हटाने पर ही तकरार हो गई। मुद्दा सड़क पर रह गया; कैमरे ने भीतर की कहानी पकड़ ली।

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