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५ महीने से मानधन बंद…शिंदे के गढ़ में नगरसेवक बेहाल!.. ठाणे मनपा का चक्कर काटने को मजबूर

सुनील ओसवाल / मुंबई

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और नगरविकास मंत्री एकनाथ शिंदे जिस ठाणे को अपना सबसे मजबूत राजनीतिक किला मानते हैं, उसी ठाणे महानगरपालिका में चुने हुए जनप्रतिनिधियों को पिछले पांच महीनों से मानधन तक नसीब नहीं हुआ है। हालात ऐसे हैं कि जनता की समस्याओं के लिए प्रशासन से लड़ने वाले १३१ पार्षद अब खुद अपने मानधन के लिए मनपा के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
ठाणे मनपा चुनाव के बाद शिंदे गुट और भाजपा ने सत्ता तो संभाल ली, लेकिन सत्ता की कुर्सियों और समितियों के बंटवारे पर जारी अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। स्थायी समिति, विषय समितियों और कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों पर पैâसला नहीं हो पाने के कारण मनपा का बजट अटक गया है। इसका सीधा असर पार्षदों के मानधन और शहर के विकास कार्यों पर पड़ा है। जनवरी में हुए चुनाव के बाद १३१ पार्षद बड़े उत्साह के साथ मनपा पहुंचे थे। कई पार्षदों ने अपने प्रभागों में कार्यालय खोले, कर्मचारियों की नियुक्ति की और नागरिकों के कामकाज के लिए खर्च भी शुरू कर दिए। लेकिन पांच महीने बीतने के बाद भी उन्हें एक रुपया तक नहीं मिला।
प्रत्येक की बकाया राशि लगभग ९८.२५ लाख रुपए
प्रत्येक पार्षद को हर महीने १५ हजार रुपए मानधन और महासभा में उपस्थिति के लिए ५०० रुपए भत्ता मिलता है। इस हिसाब से हर महीने करीब १९ लाख ६५ हजार रुपए का खर्च बनता है, जबकि पांच महीने की कुल बकाया राशि लगभग ९८ लाख २५ हजार रुपए तक पहुंच चुकी है। सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि ठाणे मनपा हमेशा से शिंदे परिवार के प्रभाव वाली महानगरपालिका मानी जाती रही है। नगरविकास विभाग भी खुद एकनाथ शिंदे के पास है, इसके बावजूद ठाणे मनपा का बजट समय पर मंजूर नहीं हो सका।

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