-2024 में हुए नीट पेपर लीक और सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में जेल में बंद हैं संजीव मुखिया
अनिल मिश्र / पटना
करीब दो साल पहले पूरे देशभर में चर्चित नीट यूजी-2024 पेपर लीक मामले में आज गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी जांच में कहा है कि परीक्षा माफिया के नाम से चर्चित संजीव कुमार उर्फ संजीव मुखिया के खिलाफ ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो सके कि वह नीट यूजी का प्रश्नपत्र चोरी करने, उसे हल कराने या अभ्यर्थियों तक पहुंचाने की साजिश में शामिल था।
हालांकि, संजीव मुखिया फिलहाल बिहार पुलिस सिपाही बहाली परीक्षा पेपर लीक मामले में न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में लंबे समय से विवाद और विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। बिहार की राजधानी पटना में भी बुधवार को छात्रों का उग्र प्रदर्शन देखने को मिला, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। वहीं, आज सीमांचल के नाम से मशहूर कटिहार में भी समाहरणालय पर छात्रों ने प्रदर्शन किया। इसके चलते कटिहार पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज कर उन्हें वहां से हटाया।
कल राजधानी पटना में विरोध-प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी और मीडियाकर्मी घायल हो गए थे। इसी बीच सीबीआई की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई के अनुसार, विस्तृत अनुसंधान के दौरान ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह सिद्ध हो सके कि संजीव मुखिया प्रश्नपत्र की चोरी, उसे हल कराने अथवा अभ्यर्थियों में वितरित करने की साजिश का हिस्सा थे।
इस बीच आज गुरुवार को राजधानी पटना में सीबीआई ने बताया कि उसने मामले की गहन जांच के बाद पेपर लीक की पूरी साजिश और उसमें शामिल सभी प्रमुख आरोपियों की पहचान कर ली है। साथ ही उन अभ्यर्थियों की भी पहचान की गई है, जिन्हें चोरी हुए प्रश्नपत्र का लाभ मिला था। वहीं, सीबीआई के अनुसार संजीव मुखिया से जुड़े उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि उन्होंने प्रश्नपत्र चोरी कराया, लीक कराया या छात्रों के बीच वितरित कराया था।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2024 में नीट पेपर लीक हुआ था। हालांकि, इसकी साजिश का केंद्र झारखंड प्रदेश के हजारीबाग स्थित ओएसिस स्कूल था। शुरुआत में बताया गया था कि हजारीबाग में हल किए गए कुछ प्रश्नपत्र अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए थे। इसके बाद इस मामले में ईओयू ने जांच-पड़ताल की थी। शुरुआती जांच में संजीव मुखिया पर प्रश्नपत्र चोरी में शामिल होने का संदेह जताया गया था, क्योंकि वह पहले भी अन्य परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक के मामलों में आरोपित रह चुके थे। ऐसे में बिहार पुलिस ने उन्हें आरोपी बनाया था। इसके बाद ईओयू ने सुप्रीम कोर्ट को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसे बाद में सीबीआई को भी सौंप दिया गया। इसके बाद सीबीआई ने मामले की जांच की।
सीबीआई ने पेपर लीक मामले में शामिल आरोपियों की पहचान कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किया। इतना ही नहीं, पूरी साजिश को तकनीकी और फॉरेंसिक साक्ष्यों से भी जोड़ा गया। लेकिन अब संजीव मुखिया को इस मामले में राहत मिल गई है। सीबीआई का दावा है कि नीट पेपर लीक में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। हालांकि, संजीव मुखिया फिलहाल सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।
अब देखना दिलचस्प होगा कि सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में भी उन्हें क्लीन चिट मिलती है या नहीं। वहीं, नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग लगातार उठ रही है।
