श्रीकिशोर शाही
पेरिस की चकाचौंध भरी दुनिया में कड़ा संघर्ष करते हुए पामेला को एक कड़वी सच्चाई समझ आ गई थी। सिर्फ बेपनाह खूबसूरती और महत्वाकांक्षा के बल पर यूरोप के सबसे रसूखदार तबके में अपनी जगह बनाना लगभग नामुमकिन था। वहां के एलीट समाज में किसी ‘विदेशी’ को इतनी आसानी से नहीं अपनाया जाता था। पामेला को उस हाई-सोसाइटी का हिस्सा बनने के लिए एक ऐसे मास्टर-स्ट्रोक की सख्त जरूरत थी, जो रातों-रात उनके लिए यूरोप के सारे दरवाजे खोल दे। उसे एक नई यूरोपीय पहचान और सुरक्षित नागरिकता की जबरदस्त तलाश थी। इसी बेचैन तलाश के बीच पामेला की जिंदगी में हेनरी बोर्डेस नाम के एक प्रâांसीसी व्यक्ति की एंट्री हुई। हेनरी पहली ही नजर में पामेला की जादुई खूबसूरती का पूरी तरह दीवाना हो चुका था। दूसरी तरफ, पामेला के लिए हेनरी कोई सच्चा प्यार या सपनों का राजकुमार नहीं था, बल्कि वह एक मजबूत सीढ़ी था जिसकी उन्हें अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरत थी।
पामेला अब तक एक शातिर खिलाड़ी बन चुकी थी और उसने बिना समय गंवाए इस मौके को तुरंत भुनाने का पक्का पैâसला कर लिया। जल्द ही पामेला और हेनरी एक निजी समारोह में शादी के बंधन में बंध गए। दुनिया की नजरों में यह एक खूबसूरत प्रेम कहानी का शानदार अंजाम हो सकता था, लेकिन हकीकत में यह प्यार से कहीं ज्यादा सुविधा और मतलब का एक गहराई से सोचा-समझा ‘सौदा’ था। पामेला ने बड़ी ही चालाकी से इस नए रिश्ते को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया।
जैसा कि शुरू से उम्मीद थी, मतलब की बुनियाद पर टिकी यह शादी लंबे समय तक नहीं चल सकी। कुछ ही समय बाद कानूनी तौर पर दोनों के रास्ते हमेशा के लिए अलग हो गए। लेकिन इस छोटी सी शादी ने पामेला को वह सब कुछ आसानी से दे दिया, जिसके लिए उसने यह खेल खेला था। उसके हाथ में उसकी सबसे बड़ी जीत थी, एक प्रâांसीसी पासपोर्ट। यह सिर्फ एक कागज नहीं था, बल्कि यूरोप के शाही वीआईपी क्लबों में बेरोकटोक एंट्री का एक खुला पास था। सबसे बड़ी बात यह थी कि उसका पुराना वजूद अब हमेशा के लिए मिट गया था। इस अहम ‘सौदे’ ने उसे एक ऐसा नया नाम दे दिया था, जो आगे चलकर पूरी दुनिया में मशहूर होने वाला था, पामेला सिंह अब बन चुकी थी ‘पामेला बोर्डेस’।
(शेष अगले अंक में)
