-पहली बारिश ने एनएमएमसी के दावों की हवा निकाली
मनमोहन सिंह
देश के सबसे आधुनिक और सुनियोजित शहरों में शुमार नई मुंबई में मानसून की पहली ही जोरदार बारिश ने प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी है। नई मुंबई महानगरपालिका (एनएनएमसी) और महावितरण के बड़े-बड़े दावे जमीनी हकीकत के आगे पूरी तरह खोखले साबित हुए हैं। पूरा शहर इस समय जलभराव, गंदगी और जानलेवा प्रशासनिक लापरवाही से जूझ रहा है।
जलभराव से डूबा शहर, ड्रेनेज सिस्टम फेल
महानगरपालिका हर साल मानसून पूर्व सफाई के नाम पर करोड़ों रुपए का बजट पास करती है, लेकिन पहली बारिश में ही सड़कें दरिया बन गईं। वाशी, बेलापुर, नेरुल और कोपरखैरणे जैसे प्रमुख रिहायशी इलाकों में डेढ़ से दो फीट तक पानी भर गया। ड्रेनेज सिस्टम जाम होने के कारण पानी सड़कों पर ही जमा रहा, जिससे गाड़ियां बंद पड़ गईं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। निचले इलाकों में स्थित सोसायटियों और लोगों के घरों में पानी घुसने से भारी नुकसान हुआ है।
करंट की चपेट में आने से बचीं दो जिंदगियां
इस जलभराव के बीच महावितरण और महानगरपालिका की घोर लापरवाही के कारण एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। बिजली के खंभे से पैâले करंट की चपेट में आने से दो लड़कियों की जान जाते-जाते बची। गनीमत रही कि स्थानीय निवासियों ने तत्परता दिखाते हुए उनकी जान बचा ली। शहर के लगभग हर सेक्टर में बिजली के खंभों और फीडर बॉक्स के दरवाजे खुले या टूटे पड़े हैं, जो बारिश के पानी में मिलकर ‘लाइव डेथ ट्रैप’ बन चुके हैं।
गंदगी का अंबार और नागरिकों का बढ़ता गुस्सा
लापरवाही यहीं खत्म नहीं होती, शहर में जगह-जगह कचरे और गंदगी के ढेर लगे हैं। गटरों की सफाई न होने से कचरा सड़कों पर तैर रहा है, जो बीमारियों और हादसों को खुला निमंत्रण दे रहा है। शिवसेना के उप शहरप्रमुख अजय महादेव पवार पूछते हैं कि टैक्सपेयर्स की जेब पर पलने वाली महानगरपालिका और महावितरण आखिर किसकी मौत का इंतजार कर रही हैं। कागजी आंकड़ों से बाहर निकलकर प्रशासन को तुरंत इन खुले बिजली के बॉक्सों को बंद करना होगा और जल निकासी की सुचारू व्यवस्था करनी होगी, वरना आनेवाले दिनों में स्थिति और भी भयानक हो सकती है।
