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समुद्र में ‘काला खेल’! … अवैध ईंधन-बिटुमेन तस्करी पर हाई कोर्ट का बड़ा प्रहार

 

तीन संदिग्ध जहाजों को अलंग शिपयार्ड भेजने का आदेश
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई तट के पास पकड़े गए अवैध ईंधन और बिटुमेन तस्करी मामले में मुंबई हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए जहाज मालिकों को बड़ा झटका दिया है। समुद्री सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों पर कड़ा संदेश देते हुए अदालत ने तीनों संदिग्ध जहाजों को गुजरात के अलंग शिपयार्ड भेजने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश आलोक आराधे चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ ने साफ कहा कि खुले समुद्र में इन जहाजों को खड़ा रखना सुरक्षा और नौवहन के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसी आधार पर अदालत ने जहाजों को रिहा करने की मांग खारिज कर दी।

जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
दरअसल, एमटी अस्फॉल्ट स्टार, एमटी स्टेलर रुबी और एमटी अल जाफझिया नामक जहाजों को मुंबई तट से करीब ११ नॉटिकल मील दूर से जब्त किया गया था। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए जहाजों की लोकेशन ट्रैकिंग प्रणाली जानबूझकर बंद रखी गई थी। आरोप है कि इन जहाजों के जरिए ईरान से प्रतिबंधित बिटुमेन और ईंधन की तस्करी की जा रही थी।
इससे पहले हाई कोर्ट ने जहाजों पर फंसे लगभग ५० नाविकों को राहत देते हुए उनकी सुरक्षित रिहाई के आदेश दिए थे। उस दौरान अदालत ने जहाज मालिकों के गैरजिम्मेदार रवैए पर भी कड़ी नाराजगी जाहिर की थी। बाद में जहाज मालिकों ने सुरक्षा राशि जमा कर जहाजों को छोड़ने की अनुमति मांगते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। मालिकों की ओर से दलील दी गई कि लंबे समय तक जहाज एक ही स्थान पर खड़े रहने से भारी नुकसान हो रहा है। हालांकि, भारतीय तटरक्षक बल की ओर से पेश अधिवक्ता जितेंद्र मिश्रा ने अदालत को बताया कि फिलहाल जहाज मानव रहित हैं और उन्हें समुद्र में खड़ा रखना किसी बड़े खतरे को न्योता देने जैसा है। तटरक्षक बल की दलीलों को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने तीनों जहाजों को तत्काल अलंग शिपयार्ड स्थानांतरित करने के आदेश जारी कर दिए।

 

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