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बेशर्म सरकार की बीमार व्यवस्था …समिति के नाम पर जनता से गद्दारी! …दवा, डॉक्टर नदारद, एक बेड पर रखे जाते हैं दो मरीज

– महंगे उपकरणों के नाम पर ठेकेदारों की जेबें भरने का खेल
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
`महायुति’ सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए पांच महीने पहले `राज्य स्वास्थ्य नीति और तकनीकी सलाहकार समिति’ का गठन किया। इस समिति के गठन को जहां `नई तकनीक’ लाने का बहाना बताया जा रहा है, वहीं आरोप भी लग रहे हैं कि यह दलाली का नया ठिकाना बनने जा रही है। एक तरफ राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था बीमार है, जहां अस्पतालों में एक बेड पर दो-दो मरीज रखे जा रहे हैं। डॉक्टर नदारद हैं, जबकि दवाओं की किल्लत है।
इसके साथ ही जनता को कई अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर बेशर्म सरकार कागजों पर समिति बनाकर जनता से गद्दारी कर रही है। दूसरी तरफ जमीनी हकीकत से दूर नौकरशाह और नेता पॉलिसी पर बहस कर रहे हैं, जबकि असलियत में यह महंगे उपकरणों के नाम पर ठेकेदारों की जेबें भरने का खेल माना जा रहा है। फिलहाल, पांच महीने बाद कल इस समिति में एक और प्रतिनिधि को शामिल किया गया है। राज्य स्वास्थ्य नीति और तकनीकी सलाहकार समिति नामक इस नई कमेटी में सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ निजी और विदेशी संस्थानों के प्रतिनिधि भी शामिल किए गए हैं। जनता के टैक्स के पैसों पर बैठकों का नाटक कर सरकार सुधार का दिखावा कर रही है। हर तीन महीने में बैठक करने का दावा है।

शोर मचाकर करोड़ों खर्च करने की तैयारी
नई तकनीक और लागत-प्रभावशीलता का शोर मचाकर सरकार समिति के जरिए करोड़ों रुपए खर्च करने की तैयारी में है, जबकि आम मरीजों को मुफ्त इलाज, सस्ती दवा और पर्याप्त डॉक्टर तक नहीं मिल पा रहे हैं। कल शासनादेश जारी कर एफआईएनडी नामक एक और निजी संस्था को इस समिति में शामिल किया है। इससे यह साफ हो गया है कि महायुति सरकार के लिए जनता का स्वास्थ्य नहीं, बल्कि निजी संस्थानों का लाभ ही असली प्राथमिकता है।

खोखली घोषणाएं
ठाणे निवासी रामसूरत शर्मा ने कहा कि जनता के टैक्स के पैसे पर दिखावा और बैठकों का तमाशा करना ही इस सरकार का असली चेहरा है। इस सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को धराशायी कर दिया है। हालांकि, सरकार नई-नई समितियों की घोषणा कर तालियां बजवाने में जरूर लगी है। स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने की बजाय यह सरकार कागजी सुधार और कॉरपोरेट हित साधने का नया रास्ता बना रही है। इस सरकार में न जनता को राहत, न इलाज की गारंटी बस पॉलिसी, तकनीक और कमेटियों के नाम पर खोखली घोषणाएं हो रही हैं।

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