अनिल मिश्र / रांची
झारखंड की राजधानी से करीब अस्सी किलोमीटर की दूरी पर रामगढ़ जिले के रजरप्पा में छिनमस्तिका भवानी का मंदिर स्थित है। वहीं पर पली और बढ़ी एक छोटी-सी और सुदूरवर्ती क्षेत्रों में रहने वाली श्रेया पंडा की ऐतिहासिक उपलब्धि पर इस वक्त रजरप्पा सहित पूरे रामगढ़ जिले में खुशी का माहौल है।इस बीच लोगों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे झारखंड का नाम रोशन किया है। इक्कीस वर्षीय श्रेया पंडा ने स्वदेशी ह्यूमनॉइड रोबोट सिएना का विकास कर श्रेया ने यह साबित कर दिया है कि सपनों को साकार करने के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा जरूरी है बड़ा विजन, कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास। उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक प्रेरित करती रहेगी।प्रतिभा और जुनून के सामने संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं बनती। झारखंड के रामगढ़ जिले के रजरप्पा की रहने वाली इक्कीस वर्षीय श्रेया पंडा ने इसे सच साबित कर दिखाया है।बेहद ही कम उम्र में उन्होंने पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित ह्यूमनॉइड रोबोट सिएना (SIENA) यानी स्मार्ट इंटरेक्टिव एजुकेशनल न्यूरल असिस्टेंट विकसित कर तकनीकी क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल झारखंड प्रदेश में बल्कि पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। आज श्रेया पंडा युवा पीढ़ी, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गई हैं।श्रेया पंडा फिलहाल पैराडॉक्स इनोवोटर प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक एवं मुख्य परिचालन पदाधिकारी (सीओओ) के रूप में कार्यरत हैं।वह मां छिन्नमस्तिके मंदिर के वरिष्ठ पुजारी सह मंदिर न्यास समिति के सचिव शुभाशीष पंडा और जया पंडा की बेटी हैं। श्रेया की इस उपलब्धि से रामगढ़ के छोटे से क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाली रजरप्पा क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। इस बीच स्थानीय लोगों, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और पंडा समाज के सदस्यों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया है।इस बीच स्थानीय लोगों का कहना है कि श्रेया ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े महानगर की मोहताज नहीं होती।
