तानसा में १४ प्रतिशत, मोडकसागर में ८ और अन्य में ४ प्रतिशत गाद मौजूद
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई को जलापूर्ति करनेवाली सात झीलें मनपा के अधीन आती हैं, जिनमें से तुलसी और विहार मुंबई में हैं, जबकि बाकी पांच झीलें तानसा, भातसा, मोडकसागर, मध्य वैतरणा और वैतरणा मुंबई से १२० किलोमीटर दूर स्थित हैं। मनपा अधिकारी की जानकारी के अनुसार, अब तक सभी झीलों में ९० प्रतिशत से भी ज्यादा पानी भर चुका है, लेकिन झीलों में पानी के साथ ही गाद जमा होने की रिपोर्ट भी सामने आई है, लेकिन गाद की सफाई के लिए मनपा के पास कोई उपाय नहीं है।
मनपा ने महाराष्ट्र अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्था (एमईआरआई) को झीलों का सर्वे कर यह पता लगाने को कहा था कि कितने प्रतिशत गाद जमा है। एमईआरआई ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट मनपा को सौपी है, जिसमें उन्होंने कहा है कि अलग-अलग झीलों में ४ से १५ प्रतिशत तक गाद जमा है। रिपोर्ट के अनुसार, तानसा झील में गाद की मात्रा १४ प्रतिशत है, जो कि अन्य झीलों की तुलना में सबसे अधिक है। वहीं मोडकसागर में ८ प्रतिशत गाद जमा है। मनपा के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तानसा १३० वर्ष पुरानी झील है इसलिए यहां गाद अधिक है। वहीं अन्य झीलों में गाद की मात्रा ४ प्रतिशत से कम है।
मनपा जल अभियंता पी.एल. मालवदे ने बताया कि हमने एमईआरआई को इसे साफ करने के लिए जिम्मेदारी भी दी थी, लेकिन उन्होंने हमसे कहा कि मौजूदा समय में हमारे पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है, जिससे हम इतनी बड़ी झील की गाद को साफ कर सकें। एमईआरआई ने गाद सफाई के लिए सेंट्रल वॉटर कमिशन (सीडब्ल्यूसी) से मदद मांगी है। हालांकि, जल अभियंता ने ये भी बताया कि गाद का असर मुंबई की वॉटर सप्लाई पर नहीं पड़ता है, क्योंकि हम हर झील में डेड वॉटर स्टॉक रखते हैं। इससे एक तय सीमा तक पानी का उपयोग होने के बाद झील के निचले स्तर का पानी उपयोग में नहीं लाया जाता है। इससे पानी की क्वॉलिटी पर भी असर नहीं पड़ता है क्योंकि झीलों से पानी पहले वॉटर प्लांट में जाता है, फिर उसकी लैब में जांच होती है।
