मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : गालीबाज संत!

झांकी : गालीबाज संत!

अजय भट्टाचार्य

गेरूआ वस्त्र धारण कर अपशब्द ही नहीं, सीधे माता की गाली, वह भी दूरदर्शन जैसे सार्वजनिक मंच पर! यह कौन सा सनातनी है गेरूवा वस्त्रधारी। दूरदर्शन पर गोदी पत्रकार सरकारी ऐजेंडा चलाने के लिए ऐसे लोगों को बुलाते हैं, जिन्हें किसी शोकसभा में भी प्रवेश न मिले। अपशब्द कहने के बाद भी इस गंदे इंसान को जी- जी कहके संबोधन करना तो और ज्यादा शर्मनाक है। चैनल जहां पूरे देश के परिवार और महिला एंकर मौजूद हों, वहां धर्म का चोगा ओढ़े एक संत की जुबान से ऐसी घिनौनी भाषा निकलना बेहद शर्मनाक है। यह घटना साफ दिखाती है कि भगवा वस्त्र पहनने से कोई साधु नहीं हो जाता असली साधु वही है जो अपने गुस्से और अपनी वाणी पर काबू रख सके। एक सांसद के भगवा पहनने से उद्वेलित हुआ सरकारी भगवाधारी संत समाज अब मौन क्यों है?
हर जगह चंपत
केंद्र सरकार में तीन मंत्री चंपत राय से कम नहीं हैं। जैसे चंपत ने राम मंदिर में हो रही लूट पर आंखें बंद कर ली थी, वैसे ही इन मंत्रियों ने अपने मंत्रालय में हो रही खुली लूट पर आंखें बंद कर रखी है। इनमें से दो मंत्रालय में मंत्री लंबे समय से विराजमान हैं। अब इनके विभाग बदलने की चर्चा जोरों पर है। मंत्री मस्त हैं क्योंकि वे जानते हैं कि जाति, संघ और एक बड़े नेता के दम पर मंत्री बने रहेंगे। एक मंत्री संघ के भरोसे है, दूसरा नेता के भरोसे है। राम भरोसे कोई नहीं है, क्योंकि राम जिनके भरोसे थे, उन्होंने राम को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। राम मंदिर से लेकर राम राज्य का वादा करने वाली सरकार तक, चंपत हर जगह चपत लगा रहे हैं।
बिना कागज कार्रवाई नहीं
एक समय था जब किसी मंत्री के कहने भर से ही सरकारी कामकाज शुरू हो जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। अफसरशाही का मौजूदा मिजाज बदल गया है। गुजरात के एक मंत्री ने अपने विभाग के एक आईएएस अधिकारी को फोन करके किसी परिचित के लिए एक छोटा सा काम करने को कहा। अधिकारी का जवाब था, ‘सर, हमें लिखित में निर्देश दीजिए और हम तुरंत काम कर देंगे।’ संदेश बिल्कुल साफ था- आदेशों का पालन तो होगा, लेकिन सिर्फ लिखित दस्तावेज के साथ। आज के प्रशासनिक माहौल में, ज़ुबानी निर्देश हवा हो जाते हैं; जबकि लिखित निर्देश फ़ाइल नोटिंग बन जाते हैं। ऐसा लगता है कि अब छोटी-सी मदद के लिए भी कागज़ी कार्रवाई ज़रूरी हो गई है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

अन्य समाचार