-मिर्जापुर व रीवा मार्ग पर अंधाधुंध रफ्तार का खेल…जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल
राजेश सरकार / प्रयागराज
यमुनानगर जोन के औद्योगिक क्षेत्र थाना अंतर्गत मिर्जापुर मार्ग पर बेलगाम रफ्तार ने गुरुवार को एक और परिवार की खुशियां छीन लीं। पिपरांव ग्राम मोड़ के पास जनहित हॉस्पिटल के सामने तेज रफ्तार अनुबंधित बस ने 48 वर्षीय चाय विक्रेता रामनारायण गुप्ता को जोरदार टक्कर मार दी। रफ्तार इस कदर तेज थी की रामनारायण का शरीर बस में फंसकर काफी दूर तक घसीटता चला गया था। सुबह तड़के हुए इस हादसे में गंभीर रूप से घायल रामनारायण को स्थानीय लोगों ने अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद चालक बस को मौके पर छोड़कर फरार हो गया। बस रोडवेज से अनुबंधित बताई जा रही है।
रामनारायण गुप्ता मूलत: यमुनानगर मेजा क्षेत्र के रहने वाले थे। वर्तमान में परिवार के साथ रामपुर करछना क्षेत्र में रहते थे।
वहीं चाय-पान की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। परिजन के मुताबिक बुधवार को वह मुंबई से लौटे थे। गुरुवार को दुकान खोलने जाते समय वह पिपरांव मोड़ के पास मिर्जापुर मार्ग पर जनहित अस्पताल पहुंचे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार बस ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। सुबह-सुबह हुए इस हादसे के बाद सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग उनको अस्पताल लेकर दौड़े लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। सूचना पर औद्योगिक क्षेत्र थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और बस को कब्जे में ले लिया। चालक के फरार होने के बाद पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। पुलिस दुर्घटना के कारणों के साथ बस की रफ्तार, चालक की भूमिका और अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
सितंबर में तीन मौतें, फिर भी नहीं टूटी रफ्तार
मिर्जापुर-प्रयागराज मार्ग पर सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि सितंबर में ही इस मार्ग पर अलग-अलग हादसों में कम से कम तीन मौतें सामने आ चुकी हैं। 10 सितंबर को मेजा क्षेत्र के जगेपुर गांव के सामने दो बाइक की भिड़ंत में एक युवक की मौत हुई थी। इसके अगले ही दिन, 11 सितंबर को मिर्जापुर के विंध्याचल क्षेत्र में मिर्जापुर-प्रयागराज हाईवे पर कार की टक्कर से बाइक सवार दो लोगों की मौत की रिपोर्ट सामने आई। अब पिपरांव मोड़ पर रामनारायण गुप्ता की मौत ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों में सितंबर की इन घटनाओं में कम से कम तीन मौतें दर्ज हैं। गुरुवार की घटना को जोड़ने पर यह संख्या कम से कम चार हो जाती है।
अत्यंत जरूरी है रफ्तार पर अंकुश
मिर्जापुर और रीवा राजमार्ग पर निजी तथा अनुबंधित बसों की रफ्तार और संचालन को लेकर स्थानीय लोगों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। आरोप है कि कई बसें निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां भरकर सड़क पर दौड़ती हैं। तेज रफ्तार के साथ ओवरलोडिंग का यह मेल किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है। यातायात और परिवहन विभाग की निगरानी के बावजूद यदि बसें क्षमता से अधिक सवारियां लेकर और तेज रफ्तार में दौड़ रही हैं तो नियमित चेकिंग कहां हो रही है? क्या बसों की फिटनेस, परमिट, चालक के लाइसेंस और निर्धारित गति सीमा की नियमित जांच होती है? यदि होती है तो नियम तोड़ने वाले वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नजर नहीं आती? यह सारे ज्वलंत प्रश्न संबंधित विभाग और कमिश्नरेट प्रशासन को संज्ञान में लेकर सड़क सुरक्षा के पुख्ता और सार्थक इंतजाम किए जाने चाहिए।
सड़क पर नियमों से ज्यादा हावी ‘जल्दी पहुंचने’ की होड़
स्थानीय लोगों का कहना है कि मिर्जापुर और रीवा मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों के कारण पैदल राहगीरों, बाइक सवारों और छोटे वाहनों के लिए खतरा लगातार बना रहता है। निजी बसों के बीच यात्रियों को जल्द उतारने-चढ़ाने और समय से गंतव्य तक पहुंचने की होड़ में गति पर नियंत्रण नहीं रहने की शिकायतें भी उठती रही हैं। रामनारायण गुप्ता की मौत के बाद फिर सवाल उठ रहा है कि सड़क पर किसी निर्दोष की जान जाने का इंतजार आखिर कब तक होता रहेगा? हादसे के बाद बस और चालक की जांच जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए हाईवे पर नियमित स्पीड चेकिंग, ओवरलोडिंग के खिलाफ अभियान, बसों की फिटनेस जांच और नियम तोड़ने वाले चालकों पर प्रभावी कार्रवाई की जाए।
पत्नी और तीन बेटों पर टूटा दुखों का पहाड़
रामनारायण की मौत से पत्नी और तीन पुत्र आशीष, विनोद और अशोक बेसहारा हो गए हैं। तीनों पुत्र अभी पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार की आजीविका रामनारायण की कमाई पर निर्भर थी। अचानक हुई मौत से परिवार के सामने तंगी का संकट गहरा गया है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की है। साथ ही तीनों बच्चों की शिक्षा जारी रखने के लिए मदद तथा परिवार के भविष्य के लिए रोजगार अथवा अन्य सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।
प्रशासन के सामने सीधा सवाल
रामनारायण की मौत केवल एक सड़क दुर्घटना बनकर फाइल में दर्ज हो जाएगी या इससे सबक लेकर मिर्जापुर और रीवा मार्ग पर दौड़ने वाली निजी एवं अनुबंधित बसों की रफ्तार और ओवरलोडिंग पर वास्तविक अंकुश लगेगा? यह सवाल अब परिवहन विभाग, यातायात पुलिस और स्थानीय प्रशासन के सामने है। सड़क पर नियमों की अनदेखी जारी रही तो अगला शिकार कौन होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं होगा।
