ईस्टर्न रेंज के सभी सर्कल में नुक्कड़ नाटक का आयोजन करवाया जिसमें स्कूली बच्चों व आम जनता को ट्रैफिक के नियम की गंभीरता समझाई। इस मुद्दे पर ईस्टर्न रेंज की डीसीपी श्वेता सिंह चौहान से वरिष्ठ पत्रकार योगेश कुमार सोनी की एक्सक्लूसिव बातचीत…
सवाल: ईस्टर्न रेंज के सभी ट्रैफिक सर्किल में नुक्कड़ नाटक आयोजित कराने के पीछे आपकी क्या सोच रही?
सड़क सुरक्षा केवल चालान करने या नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने से सुनिश्चित नहीं हो सकती। इसके लिए लोगों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना पैदा करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से ईस्टर्न रेंज के सभी ट्रैफिक सर्किल में नुक्कड़ नाटकों का आयोजन कराया गया। नाटक के माध्यम से लोगों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि छोटी-सी लापरवाही भी सड़क दुर्घटना का कारण बन सकती है।
सवाल: नुक्कड़ नाटक को सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए किस तरह प्रभावी मानती हैं?
जवाब: नुक्कड़ नाटक एक ऐसा माध्यम है, जो सीधे लोगों के बीच जाकर अपनी बात रखता है। इसमें यातायात नियमों को केवल भाषण के रूप में नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की परिस्थितियों और घटनाओं के माध्यम से समझाया जाता है। इससे बच्चे, युवा और आम नागरिक आसानी से जुड़ते हैं और संदेश लंबे समय तक याद रहता है।
सवाल: इन कार्यक्रमों में स्कूली बच्चों को विशेष रूप से शामिल करने की क्या वजह है?
जवाब: बच्चे समाज में बदलाव के मजबूत माध्यम हैं। अगर उन्हें कम उम्र से ही हेलमेट, सीट बेल्ट, निर्धारित गति, स्टॉप लाइन, गलत दिशा में वाहन न चलाने और सड़क पार करने जैसे नियमों की जानकारी दी जाए तो वे भविष्य में जिम्मेदार सड़क उपयोगकर्ता बन सकते हैं। साथ ही बच्चे अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को भी यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
सवाल: आज भी कई लोग ट्रैफिक नियमों को सामान्य बात समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसे आप किस तरह देखती हैं?
जवाब: यातायात नियम किसी को परेशान करने के लिए नहीं बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य सड़क पर हर व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लोग अक्सर हेलमेट न पहनने, सीट बेल्ट न लगाने, गलत दिशा में वाहन चलाने या मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने को छोटी गलती मान लेते हैं, लेकिन सड़क पर छोटी गलती का परिणाम बहुत गंभीर हो सकता है। इसलिए नियमों को सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा का हिस्सा समझना जरूरी है।
सवाल: नुक्कड़ नाटकों के दौरान लोगों को किन प्रमुख नियमों के प्रति जागरूक किया गया?
जवाब: कार्यक्रमों में ओवरस्पीडिंग, रैश ड्राइविंग, गलत दिशा में वाहन चलाने, हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल, स्टॉप लाइन का पालन, नशे में वाहन न चलाने, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करने तथा नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जागरूक किया गया। हमारा प्रयास है कि लोग नियमों को केवल कार्रवाई के डर से नहीं, बल्कि अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए अपनाएं।
सवाल: क्या केवल जागरूकता कार्यक्रमों से सड़क सुरक्षा का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है?
जवाब: जागरूकता और प्रवर्तन दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। जहां लोगों को लगातार समझाने और जागरूक करने की जरूरत है, वहीं नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई भी जरूरी है। हमारा उद्देश्य ऐसा यातायात वातावरण बनाना है, जहां लोग स्वेच्छा से नियमों का पालन करें और सड़क पर दूसरे लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें।
सवाल: आम अभिभावकों के लिए आपका क्या संदेश है?
जवाब: अभिभावकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति देने के बजाय उन्हें यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा के बारे में समझाना चाहिए। माता-पिता स्वयं हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल करेंगे तो बच्चे भी उससे सीखेंगे। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि सड़क पर थोड़ी जल्दी पहुंचने से ज्यादा महत्वपूर्ण सुरक्षित घर पहुंचना है।
सवाल: अंत में पूर्वी दिल्ली के वाहन चालकों और आम जनता से क्या अपील करना चाहेंगी?
जवाब: मेरी सभी सड़क उपयोगकर्ताओं से अपील है कि यातायात नियमों को बोझ न समझें। हेलमेट पहनें, सीट बेल्ट लगाएं, निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाएं, गलत दिशा में वाहन न चलाएं और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करें। सड़क पर हमारा व्यवहार केवल हमारी नहीं, बल्कि दूसरे लोगों की जिंदगी को भी प्रभावित करता है। सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक की है। हम सभी मिलकर ही सुरक्षित सफर का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।
