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तड़का : मच्छर नहीं, व्यवस्था की परीक्षा

-कविता श्रीवास्तव

मुंबई में मच्छर जनित बीमारियों का प्रकोप एक बार फिर चिंता बढ़ा रहा है। महज १५ दिनों में मलेरिया, डेंगी और चिकनगुनिया के २,११० मामले सामने आए हैं। यह बताता है कि शहर मे मच्छर नियंत्रण और साफ-सफाई को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है। फिलहाल औसतन हर दिन करीब १४० मुंबईकर इन बीमारियों की चपेटमें आ रहे हैं। डेंगी और चिकनगुनिया के साथ मलेरिया भी चिंता बढ़ा रही है। मलेरिया इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है। मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए घर में पानी जमा न होने देना, कूलर और गमलों की नियमित सफाई करना, पूरी बांह के कपड़े पहनना और मच्छररोधी उपाय अपनाना जरूरी है। साथ ही नालों, गटरों और जलनिकासी व्यवस्था की नियमित सफाई महानगरपालिका की जिम्मेदारी है। खुले में मच्छरों के प्रजनन की संभावना बढ़ती है। इसलिए ऐसे स्थानों की पहचान कर नियमित रूप से लार्वानाशक दवाओं का छिड़काव, फॉगिंग और आवश्यकतानुसार अन्य मच्छर नियंत्रण उपाय किए जाने चाहिए।
सिर्फ बीमारी फैलने के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रिवेंटिव एक्शन यानी बीमारी फैलने से पहले रोकथाम पर जोर देना जरूरी है। निर्माण स्थलों, खाली भूखंडों, झोपड़पट्टियों, नालों, बंद पड़ी इमारतों और जलभराव वाले क्षेत्रों की नियमित निगरानी होनी चाहिए। फिलहाल मुंबई में डेंगी के ५९८ मामले भी बताते हैं कि मच्छरों का प्रजनन रोकने में अभी काफी काम किया जाना बाकी है। डेंगी में तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं तथा कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स कम होने की स्थिति भी सामने आती है। चिकनगुनिया में बुखार के साथ विशेष रूप से जोड़ों में तेज दर्द और कमजोरी लंबे समय तक परेशान कर सकती है। इसलिए लगातार बुखार, कंपकंपी, बदन दर्द, सिरदर्द या असामान्य कमजोरी जैसे लक्षणों में स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक जांच कराना चाहिए। मच्छर जनित बीमारियों के अलावा H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामले भी सामने आ रहे हैं। इसलिए तेज बुखार, सूखी खांसी, गले में खराश, सर्दी-जुकाम और बदन दर्द जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। मुंबई महानगरपालिका देश के बड़े और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण महानगरों में से एक है। शहर से मिलने वाले राजस्व के अनुपात में नागरिक सुविधाओं, स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी व्यवस्थित काम होना चाहिए। मच्छर नियंत्रण के लिए फॉगिंग, दवाओं का छिड़काव, नालों की सफाई, जलजमाव खत्म करना, कचरा हटाना और मच्छरों के प्रजनन स्थलों की निगरानी जरूरी है। धुआं छोड़ने वाली मशीनें केवल दिखाई देने वाली कार्रवाई न बनें, बल्कि उनका इस्तेमाल वैज्ञानिक मानकों और वास्तविक जरूरत के अनुसार हो। मुंबईकरों की सुरक्षा के लिए सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। नागरिक पानी जमा न होने दें, और बीएमसी यह सुनिश्चित करे कि जहां पानी जमा होने की संभावना है, वहां प्रशासन पहले पहुंचे, मच्छर पैदा होने के बाद नहीं। यही बीमारी के इलाज से बेहतर और जनहित में सबसे प्रभावी रास्ता है।

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