मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का: ढुलमुल नहीं सख्त कार्रवाई हो

तड़का: ढुलमुल नहीं सख्त कार्रवाई हो

कविता श्रीवास्तव

देश में मेडिकल प्रवेश के लिए नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों ने करोड़ों छात्रों और उनके परिवारों को झकझोर कर रख दिया है। परीक्षा कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की भूमिका फिर संदेह में है। यह सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि उस भरोसे पर चोट है जिस पर लाखों विद्यार्थी अपना भविष्य बनाते हैं। जब कोई छात्र दिन-रात मेहनत करता है, माता-पिता कर्ज लेकर कोचिंग फीस भरते हैं, परिवार अपनी जरूरतें काटकर बच्चे के सपनों को पंख देता है; तब ऐसी घटनाएं केवल व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि अन्याय भी है। प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार की खबरें सामने आती रही हैं। विपक्षी नेता राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर गंभीर आंकड़े साझा किए हैं। उन्होंने कहा है कि २०१५ से २०२६ तक १४८ परीक्षा घोटाले हुए हैं। ८७ परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और करोड़ों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ। बेहद चिंताजनक स्थिति यह है कि एकाध मामले में ही किसी को सजा हुई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसका जिम्मेदार कौन है? क्या केवल पेपर लीक करने वाले गिरोह जिम्मेदार हैं? नहीं, यह जिम्मेदारी उस पूरे तंत्र की है जिसमें लापरवाही, भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी रही, जिसने ऐसी घटनाओं को संभव बनाया। परीक्षा एजेंसियों की सुरक्षा व्यवस्था, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, तकनीकी निगरानी और प्रशासनिक पारदर्शिता इन सभी स्तरों पर सख्ती की आवश्यकता है। सबसे दुखद पहलू यह है कि कई छात्रों ने मानसिक दबाव में आत्महत्या जैसे कदम उठाए हैं। यह बेहद चिंताजनक है। अब केवल जांच और गिरफ्तारी से काम नहीं चलेगा। दोषी अधिकारियों, दलालों और राजनीतिक संरक्षण देने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। परीक्षा प्रणाली को इतना मजबूत बनाना होगा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं असंभव हो जाएं। हमें बच्चों को यह भरोसा देना होगा कि उनका भविष्य केवल एक परीक्षा से तय नहीं होता। असफलता अंत नहीं है और भ्रष्ट व्यवस्था के कारण आई बाधा उनके सपनों को खत्म नहीं कर सकती। भारत युवाओं का देश बनने का दावा करता है। यदि युवाओं की मेहनत और उनके सपनों की रक्षा नहीं की गई, तो यह सबसे बड़ी राष्ट्रीय विफलता होगी। अब समय आ गया है कि परीक्षा व्यवस्था में आमूलचूल सुधार हो, ताकि किसी छात्र की आंखों में मेहनत के बाद आंसू नहीं, सफलता की चमक दिखे।

अन्य समाचार