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शहर की कहानी, मुंबईकरों की जुबानी… वेंटिलेटर पर ‘बेस्ट’

-बसों की कमी और लचर रखरखाव ने खोली बेस्ट प्रशासन की पोल

द्रुप्ति झा / मुंबई

मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली बेस्ट उपक्रम की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। बसों के बेड़े में कमी, यात्रियों को हो रही असुविधा, लचर यातायात प्रबंधन और खस्ताहाल बसों के खराब रखरखाव जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर ‘आपली बेस्ट आपल्यासाठी’ संगठन ने बेस्ट प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। इन समस्याओं पर चर्चा के लिए हाल ही में बेस्ट भवन में बेस्ट समिति की अध्यक्ष तृष्णा विश्वासराव की अध्यक्षता में संयुक्त बैठक आयोजित की गई, जिसमें संगठन ने बेस्ट प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
बेस्ट की कमियां आईं सामने
बैठक में संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि बेस्ट के बस बेड़े में लगातार कमी आ रही है और जो बसें चल रही हैं, उनके रखरखाव की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है। इसके कारण मुंबईकरों को रोजाना सफर के दौरान भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन का आरोप है कि यातायात प्रबंधन पूरी तरह चरमरा गया है। साथ ही, बेस्ट प्रशासन आय बढ़ाने और विज्ञापनों के माध्यम से राजस्व बढ़ाने के प्रभावी उपाय करने में भी विफल रहा है, जिससे उपक्रम आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
संगठन ने आरोप लगाया कि कर्मचारी कल्याण योजनाओं की अनदेखी की जा रही है। बेस्ट में बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं, जिससे मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।
बैठक के दौरान बेस्ट समिति की अध्यक्ष तृष्णा विश्वासराव ने अधिकारियों को लंबित मांगों और समस्याओं का समयबद्ध समाधान करने के निर्देश दिए। हालांकि, अधिकारियों ने इस बार भी आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन ही दिया। बस मार्ग संख्या २०० और ४९४ के विस्तार की मांग पर भी तत्काल निर्णय लेने के बजाय उसे व्यवहार्यता जांच के लिए आगे बढ़ा दिया गया।
बदहाल व्यवस्था से यात्रियों में बढ़ रही नाराजगी
मुंबई की धड़कन कही जाने वाली बेस्ट बस सेवा की बदहाल व्यवस्था को लेकर आम नागरिकों में गहरा असंतोष है। यात्रियों का कहना है कि रोजाना बसों की कमी, अनियमित सेवा और खराब रखरखाव के कारण उनका सफर मुश्किल होता जा रहा है। यात्री संगठनों ने मांग की है कि बेस्ट प्रशासन जल्द से जल्द नई इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों को बेड़े में शामिल करे तथा चालक और परिचालकों के रिक्त पद भरकर सेवा को फिर से विश्वसनीय, सुरक्षित और समयबद्ध बनाए।

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