-तमिलनाडु शराब घोटाले में ईडी पर `सुप्रीम’ आकलन
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु स्टेट मार्वेâटिंग कॉर्पोरेशन से जुड़े १०,०० करोड़ रुपए के घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय को मंगलवार को कड़ी फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई ने यह भी कहा कि वह ईडी की जांच पर कुछ कहना नहीं चाहते, वरना ये भी सोशल मीडिया पर चर्चा का मुद्दा बन जाएगा। मंगलवार को सीजेआई बी. आर. गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच मामले पर सुनवाई कर रही थी।
बता दें कि ईडी ने १,००० करोड़ रुपए के घोटाला मामले में मार्च में टीएएसएमएसी के चेन्नई स्थित हेडक्वार्टर में छापेमारी की थी। यह छापेमारी शराब की बोतलों की कीमत बढ़ाना, टेंडर में हेराफेरी और रिश्वतखोरी को लेकर हुई थी। इस दौरान एजेंसी के अधिकारियों ने टीएएसएमएसी के कंप्यूटर और अन्य सामान जब्त किए थे। कोर्ट ने कहा कि क्या राज्य पुलिस इस मामले को नहीं देख सकती थी, ईडी का आना जरूरी था। सुनवाई के दौरान टीएएसएमएसी की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी संस्था पर वैâसे छापेमारी की जा सकती है, जबकि कार्रवाई का आदेश खुद टीएएसएमएसी ने ही दिया था। कपिल सिब्बल ने कहा कि मैनेजिंग डायरेक्टर्स के यहां छापेमारी की गई, एक बार एफआईआर हुई तो ईएसआईआर भी हो गई, यह मामला कुछ ही समय में बंद हो सकता है। कपिल सिब्बल ने कहा कि हमें फैसला करना होगा कि हमें क्या करना है और क्या नहीं और ईडी क्या कर रही है। ईडी ने कंप्यूटर जब्त कर लिए, ये तो बहुत हैरान करने वाली बात है। तमिलनाडु सरकार के वकील सिब्बल ने अपनी दलीलें जारी रखते हुए कहा कि जहां तक ४१ अभियुक्तों का सवाल है, उन पर तो जांच भी नहीं चल रही।
`क्या ये राज्य के अधिकार में दखल नहीं?’
मंगलवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि जब राज्य सरकार जांच कर रही है तो ईडी की जांच क्यों? ऐसा भी नहीं है कि राज्य सरकार इस मामले में चुप बैठी है। कानून-व्यवस्था राज्य के अधिकार क्षेत्र में है। क्या आप राज्य की जांच के अधिकार का अतिक्रमण नहीं कर रहे? जब भी आपको संदेह हो कि राज्य ठीक से जांच नहीं कर रहा है तो आप हस्तक्षेप करेंगे?
