सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य में आरक्षण का मुद्दा गरमाया हुआ है। मराठा आरक्षण का मुद्दा अभी सुलझा नहीं कि अब ओबीसी मामले की चिंगारी भड़क उठी है। इस आरक्षण मुद्दे को लेकर महायुति सरकार के भीतर कलह की आग जल उठी है। मंत्रिमंडल की बैठक में आरक्षण को लेकर नाराजगी साफ नजर आई। बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में एनसीपी मंत्री और ओबीसी नेता छगन भुजबल ने दूरी बनाई।
एनसीपी और ओबीसी नेता छगन भुजबल ने मराठा आरक्षण से संबंधित जीआर पर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भुजबल ने राज्य मंत्रिमंडल की बैठक का बहिष्कार किया। उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की प्री-कैबिनेट बैठक में हिस्सा लिया था, लेकिन बैठक खत्म होते ही वे राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में न जाकर बाहर निकल गए।
भुजबल ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कोर्ट में जाने का भी एलान किया है। भुजबल के अनुसार, सरकार ने मराठा समाज को लेकर जो आंदोलन के बाद पैâसला लिया है, वह गलत है, उससे ओबीसी समाज को नुकसान होगा। मंत्रिमंडल में भुजबल की नाराजगी का मुद्दा भी गूंंजा। मंत्री पंकजा मुंडे ने भी इस मामले को उठाया और सीएम देवेंद्र फडणवीस से ओबीसी के मुद्दे पर विचार करने का निवेदन किया। अन्य कई मंत्रियों ने फडणवीस से इस मामले को और नहीं बढ़ाने का आग्रह किया। उनका कहना था कि इस आरक्षण के मामले में महायुति को काफी नुकसान हो रहा है।
अपनी ही सरकार के निर्णय के खिलाफ जाएंगे कोर्ट
भुजबल का कहना है कि उन्हें सरकार द्वारा मराठा आरक्षण पर निकाले गए जीआर का विरोध है। उन्होंने प्रतिक्रिया दी और कहा कि जाति बदली नहीं जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि इस जीआर पर वकीलों से सलाह लेंगे। उनका स्पष्ट मत है कि किसी भी जाति को उठाकर दूसरी जाति में डालने का अधिकार किसी भी सरकार को नहीं है। भुजबल ने आगे कहा कि ओबीसी नेता और कार्यकर्ताओं के मन में इस जीआर को लेकर बड़ी शंकाएं हैं। उन्होंने घोषणा की कि वे कानूनी रास्ता अपनाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
