सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र विधानसभा में कांग्रेस विधायक नितिन राऊत व अन्य सदस्यों द्वारा प्रश्नोत्तर के माध्यम से पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में महिला व बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने स्वीकार किया है कि लाडली बहन योजना का लाभ सरकारी महिला कर्मचारियों ने भी उठाया है। इसमें योजना का लाभ उठाने वाली करीब २,२८९ सरकारी कर्मचारी महिलाओं का समावेश है। तटकरे ने यह भी बताया है कि इन सभी महिलाओं का लाभ बंद कर दिया गया है।
अदिति तटकरे ने अपने लिखित जवाब में यह भी कहा है कि २०२५-२०२६ में मुख्यमंत्री लाडली बहन योजना के तहत पात्र महिलाओं को आर्थिक लाभ देने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत सामान्य वर्ग के लिए २८,२९० करोड़ रुपए, आदिवासी विकास विभाग के तहत आदिवासी वर्ग के लिए ३,२४० करोड़ रुपए और सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग के तहत अनुसूचित जाति एवं नवबौद्ध वर्ग के लिए ३,९६० करोड़ रुपए का बजट रखा गया है।
विधायक अबू आजमी ने लाडली बहन योजना की लाभार्थी महिलाओं को २,१०० रुपए कब मिलेंगे। इस सवाल के लिखित जवाब में तटकरे ने कहा है कि इसके लिए सरकार ने आवश्यक बजट का प्रावधान कर दिया है, जल्द ही इसे लाभार्थियों को दिया जाएगा। पिछली विधानसभा चुनाव में इस योजना ने सरकार को अच्छा समर्थन दिलाने में मदद की थी। हालांकि, इस योजना के लिए अलग-अलग विभागों से पैसे लेने के कारण सरकार की आलोचना भी हो रही है। लोगों का ध्यान इस बात पर है कि चुनाव के दौरान किया गया २१०० रुपए का वादा कब पूरा होगा।
सरकार की हो रही आलोचना
नवंबर २०२४ में हुए विधानसभा चुनाव से पहले महायुति सरकार ने लाडली बहनों को मिलने वाली राशि १,५०० रुपए से बढ़ाकर २,१०० रुपए करने का वादा किया था। लेकिन सात महीने बीत जाने के बाद भी यह वादा पूरा नहीं हुआ है। इस योजना के लिए आदिवासी विकास विभाग और सामाजिक न्याय विभाग का पैसा इस्तेमाल करने पर सरकार की काफी आलोचना हो रही है।
