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सरकार ने दिया मराठों को झुनझुना …जीआर से नहीं होगा कुछ हासिल! …मराठा आरक्षण के याचिकाकर्ता विनोद पाटील का दावा

सामना संवाददाता / मुंबई
मराठा आरक्षण को लेकर सरकार द्वारा जारी किया गया जीआर किसी काम का नहीं होगा। सरकारी जीआर १०० में से माइनस जीरो अंक देगा, जो प्रक्रिया थी। उसे कागज पर उतारकर सरकारी जीआर में दे दिया गया है। यह मात्र सरकारी झुनझुना के सिवाय कुछ नहीं है। अगर इसमें कुछ है तो इस संदर्भ में समिति के अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे पाटील प्रेस कॉन्फ्रेंस  लेकर बताएं कि सरकारी जीआर से मराठा समाज को किस तरह से लाभ होगा, यह बात मराठा आरक्षण के याचिकाकर्ता विनोद पाटील ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहीं।
बता दें कि २९ अगस्त से मुंबई के आजाद मैदान में मनोज जरांगे पाटील द्वारा शुरू किया गया आंदोलन सफल रहा। राज्य सरकार ने जरांगे की अधिकतर मांगें मान लीं। सरकार ने इस संबंध में तुरंत निर्णय लेने की भी इच्छा जताई। हालांकि, याचिकाकर्ता विनोद पाटील ने कहा कि मनोज जरांगे पाटील की मांगों पर सरकार द्वारा लिया गया निर्णय मराठा समाज के लिए कोई लाभप्रद नहीं होगा। उन्होंने आगे कहा कि विखे पाटील ने मनोज जरांगे को जो दस्तावेज दिए हैं, उनमें असल में क्या है, अगर कोई व्यक्ति आरक्षण का लाभ लेना चाहता है तो उसे किन सबूतों की जरूरत होगी, क्या नियम हैं? इन सब बातों का कोई उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि स्पष्ट शब्दों में कहूं तो इस जीआर का कोई फायदा या उपयोग समाज को नहीं होगा। ओबीसी नेताओं को इसे चुनौती नहीं देनी चाहिए, न ही उन्हें कोई अदालती मामला दायर करना चाहिए। क्योंकि यह कोई निर्णय नहीं है। यह पूरी तरह से असंवैधानिक है।

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