रोहित माहेश्वरी / लखनऊ
रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की ३८ इमारतों को ढहाने के रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के नोटिस पर उत्तर प्रदेश में सियासी घमासान छिड़ गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने इस कार्रवाई की तीखी आलोचना की है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा सरकार शिक्षा में भी सांप्रदायिकता देख रही है और आगामी चुनाव में राजनीतिक लाभ लेने के लिए मुस्लिम संस्थानों को निशाना बना रही है। अखिलेश यादव ने छात्रों और अभिभावकों के नाम खुला पत्र लिखकर इसे ‘बदले की राजनीति’ करार दिया है, जबकि सरकार ने इसे अवैध निर्माण पर प्रशासनिक कार्रवाई बताया है।
निषाद के बयान से हलचल
यूपी सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद के एक बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा उनके लिए ‘दरवाजा बंद’ करेगी तो वह नया राजनीतिक ठिकाना तलाश लेंगे। उनके इस बयान के बाद एनडीए में निषाद पार्टी की भूमिका और २०२७ विधानसभा चुनाव को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, संजय निषाद ने भाजपा के साथ अपने संबंधों को मजबूत बताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल निषाद समाज के हितों और अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाना है। राजनीतिक गलियारों में उनके बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं।
जवाहर भवन अग्निकांड: बेअसर साबित हो रहे प्रशासनिक दावे
लखनऊ के बेहद सुरक्षित माने जाने वाले हजरतगंज इलाके की सरकारी इमारत ‘जवाहर भवन’ में लगी भीषण आग ने उत्तर प्रदेश में अग्नि सुरक्षा के दावों की एक बार फिर पोल खोल दी है। राज्य में लगातार हो रहे भयानक अग्निकांडों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे जनता में गहरा आक्रोश है। हाल ही में लखनऊ के अलीगंज इलाके के एक कोचिंग सेंटर में भड़की भीषण आग में १५ मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई थी। खिड़कियों से कूदते और धुएं में दम तोड़ते छात्रों की उस खौफनाक मंजर की यादें अभी धुंधली भी नहीं हुई थीं कि शासन की नाक के नीचे इस वीआईपी इमारत में आग लग गई। विपक्ष और आम जनता का आरोप है कि अलीगंज जैसी बड़ी त्रासदी में इतने बच्चों की जान जाने के बाद भी प्रशासन गहरी नींद से नहीं जागा है। कागजों पर चलने वाले फायर ऑडिट और दिखावे की कार्रवाई धरातल पर पूरी तरह बेअसर साबित हो रही है। सरकारी इमारतों से लेकर व्यावसायिक परिसरों तक, सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ जारी है।
