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देखते रह गई मोदी सरकार… एक साल में हुआ ४८,००० करोड़ का बैंकिंग फ्रॉड… आरबीआई की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में वित्तीय धोखाधड़ी की कुल राशि में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष २०२५-२६ में बैंकिंग फ्रॉड की कुल वैल्यू ४६ प्रतिशत बढ़कर ४८,०२१ करोड़ रुपए तक पहुंच गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा ३२,८०३ करोड़ रुपए था।
हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि फ्रॉड मामलों की कुल संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आई है। वर्ष २०२५-२६ में १०,११४ धोखाधड़ी के मामले दर्ज हुए, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या २३,७२२ थी। इससे यह संकेत मिलता है कि छोटे-छोटे फ्रॉड कम हुए हैं, लेकिन उच्च मूल्य वाले वित्तीय घोटालों में बढ़ोतरी हुई है। सरकारी बैंकों पर सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिला, जहां फ्रॉड की राशि २३,६१७ करोड़ रुपए से बढ़कर ३५,७०९ करोड़ रुपये हो गई। वहीं निजी बैंकों में यह आंकड़ा ८,९२७ करोड़ रुपए से बढ़कर ११,३९९ करोड़ रुपए तक पहुंच गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ३१४ पुराने मामलों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पुन: जांच कर शामिल किया गया, जिनकी संयुक्त राशि ३०,१९९ करोड़ रुपए रही। सबसे अधिक धोखाधड़ी बैंक लोन और एडवांस श्रेणी में दर्ज की गई, जहां ८,६४० मामलों में कुल ४०,७७४ करोड़ रुपए की हेराफेरी सामने आई।
बड़े घोटालों ने बढ़ाई बैंकिंग चिंता
बैंकिंग फ्रॉड की कुल राशि में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो अब ४८,०२१ करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। हालांकि मामलों की संख्या घटकर १०,११४ रह गई है। इससे स्पष्ट है कि छोटे फ्रॉड कम हुए हैं, लेकिन बड़े और उच्च मूल्य वाले वित्तीय घोटाले बैंकिंग प्रणाली के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।

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