सूफी खान
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, ‘होर्मुज स्ट्रेट’ एक बार फिर धमाकों और हमलों की गूंज से दहल उठा है। जो आने वाली जंग की आहट को और मजबूत कर रहा है। ईरान ने एक बल्क वैâरियर पर छोटी नावों से ताबड़तोड़ हमला किया। खबर आई कि समुद्र के रास्ते उत्तर की ओर जा रहे एक ‘बल्क वैâरियर’ जहाज के कप्तान ने कई छोटी नौकाओं द्वारा हमला किए जाने की सूचना दी।
मीडिया रिपोर्ट बता रही हैं कि ईरान होर्मुज पर अपना शिकंजा और कसने की तैयारी में है। ईरानी सांसदों ने एक नया १२-सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत इजरायली जहाजों के होर्मुज से गुजरने पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की योजना है। वहीं, अमेरिकी जहाजों को केवल तभी अनुमति मिलेगी जब वे युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा भरेंगे। यानी आगे ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर परमानेंट टोल नाका लगाएगा।
वहीं प्रेसिडेंट ट्रंप ने तेहरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि वे ईरान के कूटनीतिक प्रस्ताव की समीक्षा तो कर रहे हैं, लेकिन सैन्य विकल्प अभी भी मेज पर है। ट्रंप ने साफ कर दिया कि अगर ईरान आगे बढ़ता है तो फिर कोई सख्त कदम उठाया जाएगा।
इधर ईरान भी अपने जहाज होर्मुज से निकाल रहा है अमेरिकी ब्लाकेट को चकमा देते हुए। ईरान का एक विशालकाय सुपरटैंकर जिसका नाम ‘ह्यूज’ है, अमेरिकी नौसेना की सख्त नाकेबंदी को चकमा देकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्रवेश करने में सफल रहा है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने के लिए उसके समुद्री रास्तों पर कड़ा पहरा बिठाया हुआ है। ‘ह्यूज’ अपने साथ लगभग १९ लाख बैरल कच्चा तेल लेकर निकला है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग २२ करोड़ डॉलर आंकी जाती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस टैंकर ने अमेरिकी रडार और सैटेलाइट की निगरानी से बचने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया। २० मार्च २०२६ को स्ट्रेट ऑफ मलाका से ईरान की ओर रवाना होने के बाद, जहाज ने अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम समुद्री भाषा में इसे ‘गोइंग डार्क’ कहा जाता है।
फरवरी और मार्च में हुए हवाई हमलों के बाद से ही दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। हालांकि, फिलहाल एक कमजोर युद्धविराम लागू है, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ है।
