-तहसीलदार कार्यालय के बाहर छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन
-नीट विवाद और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना
राधेश्याम सिंह / वसई
आंदोलनकारियों ने उठाई आवाज
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि परीक्षा विवाद से लाखों छात्रों को नुकसान हुआ है। एडवोकेट धनंजय चव्हाण और समाजसेवक मिलिंद खानोलकर ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलनों को दबाना लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।
नीट पेपर लीक होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रही थी। सोशल एनवायरनमेंटलिस्ट एक्टिविस्ट और साइंटिस्ट सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर मैदान में भूख हड़ताल पर भी बैठे थे। दिल्ली पुलिस के वांगचुक को भूख हड़ताल वाली जगह से जबरदस्ती ले जाने के बाद पूरे देश में गुस्सा देखा जा रहा है। इसी के तहत वसई में भी सोनम वांगचुक के समर्थन में धरना प्रदर्शन किया गया।
नीट पेपर लीक होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के बुलाए गए देशव्यापी प्रोटेस्ट और सोशल एनवायरनमेंटलिस्ट एक्टिविस्ट और साइंटिस्ट सोनम वांगचुक के आमरण अनशन ने एजुकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है। इसी तरह भूख हड़ताल के २१वें दिन दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को भूख हड़ताल वाली जगह से हटाकर हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया। हालांकि, उसके बाद भी वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल जारी रखी है।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का विरोध करने और सोनम वांगचुक के समर्थन में देशभर में सोशल एक्टिविस्ट, पॉलिटिकल पार्टियां, स्टूडेंट्स और नागरिक सड़कों पर उतर रहे हैं। सोमवार को वसई में तहसील ऑफिस के सामने धरना दिया गया। समाजसेवक व एडवोकेट सुमित डोंगरे, पायस मचाडो, जॉन परेरा, मिलिंद खानोलकर, मैकेंजी डाबरे, कुमार राऊत के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स, टीचर्स और स्थानीय नागरिक इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
एडवोकेट धनंजय चव्हाण ने कहा कि गलत तरीके से हुई परीक्षा की वजह से लाखों बच्चों को नुकसान हुआ है। हम इसका विरोध कर रहे हैं। यह विरोध स्टूडेंट्स को इंसाफ दिलाने के लिए है और लोग सरकार के ज़ुल्म के खिलाफ डेमोक्रेटिक तरीकों से एक साथ आ रहे हैं, वहीं समाजसेवक मिलिंद खानोलकर ने कहा कि सरकार की आंदोलन को कुचलने की चल रही कोशिशें बहुत शर्मनाक हैं।
