मुख्यपृष्ठग्लैमरथिएटर मुझे जड़ों से जोड़े रखता है -श्वेता त्रिपाठी

थिएटर मुझे जड़ों से जोड़े रखता है -श्वेता त्रिपाठी

 

हिमांशु राज

श्वेता त्रिपाठी के लिए 2026 का साल केवल अधिक काम करने का नहीं, बल्कि गहराई से व्यक्तिगत और सार्थक कहानियां गढ़ने का है। दर्शक ‘मिर्जापुर: द मूवी’ का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, वहीं श्वेता वर्षों से चुपचाप संजोए सपने को साकार कर रही हैं—अपनी कहानियां जमीनी स्तर पर बुनना है।
अभिनय के साथ-साथ वह अपनी निर्माण कंपनी को पोषित कर रही हैं और पहली फीचर फिल्म ‘मुझे जान ना कहो मेरी जान’ पर काम कर रही हैं। यह कोमल, समलैंगिक प्रेम कहानी उन्हें हृदय से जुड़ी लगती है।
इधर, थिएटर (नाटक) उनका सहारा बना हुआ है। वह न केवल मंच पर प्रदर्शन कर रही हैं, बल्कि अपना नाटक ‘कॉक’ अंतिम प्रदर्शन के लिए ला रही हैं। उसी प्रेम और जिज्ञासा से मंच लौट रही हैं, जिसने उन्हें कथावाचन की ओर खींचा था।
इस दौर पर बात करते हुए श्वेता ने कहा, “2026 ऐसा लगता है जैसे कई सपने एक साथ जी रही हूं। मैं वही अभिनेत्री हूं जो सेट पर उत्साहित हो जाती है, लेकिन अब अपनी कुछ बनाने का अर्थ समझ रही हूं। ‘मुझे जान ना कहो मेरी जां’ से हम ईमानदार, समावेशी और हृदयस्पर्शी कहानी सुना रहे हैं। हर बार नाटक में लौटना मुझे जड़ों से जोड़े रखता है। यह मुझे सच्चा और जिज्ञासु बनाए रखता है।”
फिल्म और मंच के बीच सफर श्वेता के लिए संतुलन नहीं, बल्कि सुंदर विस्तार है। यह उन्हें उन कहानियों के करीब लाता है, जो उनके और दुनिया दोनों के लिए मायने रखती हैं।

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